न्यूयॉर्क | उद्योगपति गौतम अदाणी और उनके समूह के खिलाफ अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा दर्ज आपराधिक मामले को वापस लेने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। अमेरिकी फेडरल जज निकोलस गॉरॉफिस ने इस संबंध में सरकार से अतिरिक्त जानकारी मांगी है। कानूनी जानकारों का मानना है कि जज का यह कदम ‘रूल 48(ए)’ के तहत एक सामान्य कानूनी औपचारिकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी अदालत के पास सरकार को मुकदमा चलाने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं है, इसलिए जल्द ही यह केस बंद होने की पूरी संभावना है।
समूह का तर्क और कानूनी स्थिति
अदाणी समूह की कानूनी टीम ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा है। कंपनी के वकीलों का तर्क है कि जिन लेन-देन पर सवाल उठाए गए हैं, उनका अमेरिका से कोई सीधा संबंध नहीं है और वे पूरी तरह से ब्रिटिश कानून के दायरे में आते हैं। इसके अलावा, रिश्वत के आरोपों को खारिज करते हुए समूह ने उन्हें व्यावसायिक छूट करार दिया है। समूह ने यह भी स्पष्ट किया है कि निवेशकों के हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और सभी वित्तीय दायित्वों का समय पर भुगतान किया जा रहा है।
मामला जल्द खत्म होने के आसार
अदालत ने अमेरिकी सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 13 जुलाई 2026 तक की समय-सीमा निर्धारित की है। अंतरराष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानूनी प्रक्रिया कुछ हफ़्तों में पूरी हो जाएगी और मामला औपचारिक रूप से समाप्त हो जाएगा। अमेरिकी न्याय विभाग के इस फैसले को अदाणी समूह के लिए बड़ी कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम से समूह की साख और निवेशकों का भरोसा और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

