पत्नी को प्रताड़ना: कोर्ट ने पति को सुनाई 7 साल की जेल

इंदौर। दहेज की अंतहीन भूख और संतान न होने का ताना देकर पत्नी को मौत के मुंह में धकेलने वाले एक कलयुगी पति को कानून ने उसके किए की सजा दे दी है. इंदौर की विशेष न्यायाधीश अनीता सिंह की अदालत ने आरोपी पति लखन गहलोत को दोषी करार देते हुए 7 साल के सश्रम (कठोर) कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है.

रतलाम की रहने वाली ममता का विवाह 24 अप्रैल 2012 को विदुर नगर (द्वारकापुरी) निवासी लखन पिता रमेश गहलोत के साथ हुआ था. शादी के कुछ समय बाद से ही लखन का असली रंग सामने आने लगा. वह अक्सर शराब के नशे में धुत होकर ममता के साथ बेरहमी से मारपीट करता था और मायके से और दहेज लाने का दबाव बनाता था. समय बीतने के साथ प्रताड़ना का दौर और क्रूर होता गया. शादी के कई साल बाद भी संतान न होने पर आरोपी ने ममता को मानसिक रूप से तोड़ना शुरू कर दिया. वह रोज उसे बांझपन के ताने देता और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था. घर में ही लगा ली थी फांसी ससुराल में रोज रोज मिलने वाले इन जख्मों और तानाकशी से ममता भीतर तक टूट चुकी थी. आखिरकार 23 मार्च 2020 को उसने प्रताड़ना से तंग आकर विदुर नगर स्थित अपने ही घर में फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जब मामले की बारीक जांच की, तो मृतका की डायरी और मायके वालों के बयानों में पति की हैवानियत के पुख्ता सबूत मिले. इसके बाद पुलिस ने आरोपी पति के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (दुष्प्रेरण) का मामला दर्ज कर उसे सलाखों के पीछे भेजा.

द्वारकापुरी पुलिस ने मामले की सघन जांच के बाद चालान कोर्ट में पेश किया था. कोर्ट में ट्रायल के दौरान शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक जयंत दुबे ने मजबूती से पैरवी की. उन्होंने अदालत के सामने मृतका के साथ हुई क्रूरता के वैज्ञानिक और मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किए. अभियोजन द्वारा पेश किए गए अकाट्य सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने माना कि आरोपी की प्रताड़ना के कारण ही महिला आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हुई और उसे सात वर्ष की सख्त सजा से दंडित किया.

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