कुरवाई: नगर परिषद कुरवाई के कर्मचारियों की बदहाली का मामला अब गंभीर रूप अख्तियार कर चुका है. परिषद के अनेक कर्मचारियों को पिछले 7 महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे तंग आकर करीब 15 दिन पहले कर्मचारियों ने प्रशासन को आवेदन सौंपकर इच्छामृत्यु की मांग की थी. इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला मुख्यालय से शहरी विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी जावर खान जांच के लिए कुरवाई पहुंचे.
मीडिया से चर्चा के दौरान जांच अधिकारी जावर खान ने बताया कि वे कर्मचारियों की समस्याओं का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं और जल्द ही निराकरण के लिए वरिष्ठ स्तर पर अनुशंसा भेजेंगे. उन्होंने कर्मचारियों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए आश्वासन दिया कि उनके साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.
प्रशासनिक अस्थिरता और वित्तीय संकट
कर्मचारियों ने जांच अधिकारी के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि नगर परिषद में प्रशासनिक स्थिरता का अभाव है. बीते एक साल में करीब 10 प्रभारी सीएमओ बदले जा चुके हैं और जो भी नया अधिकारी आता है, वह जिम्मेदारी लेने से बचता है. कर्मचारियों का कहना है कि न केवल उनका 7 माह का वेतन रुका हुआ है, बल्कि उनके एनपीएस और पीएफ की कटौती के बावजूद बैंक ऋणों की किश्तें न भरने के कारण वे भारी कर्ज में डूब चुके हैं.
ओमप्रकाश राय, रामस्वरूप रायकवार, बालकृष्ण विश्वकर्मा और राकेश सिंह यादव सहित कई कर्मचारियों ने बताया कि उनका परिवार अत्यधिक मानसिक तनाव से गुजर रहा है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थाई, अस्थाई और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के रुके हुए वेतन का भुगतान नहीं हुआ, तो किसी भी अप्रिय घटना या आत्महत्या की स्थिति में संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी.
अनियमितता और फिजूलखर्ची ने डुबोई लुटिया
नगर परिषद कुरवाई की इस दयनीय माली हालत के पीछे पिछले एक दशक में हुई अनियमितताओं को मुख्य कारण माना जा रहा है. वर्तमान में परिषद शासन से मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति के अनुदान पर निर्भर है, लेकिन यह राशि इतनी कम है कि इससे आधे कर्मचारियों का वेतन भी नहीं निकल पाता. स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का आरोप है कि परिषद की आर्थिक स्थिति तबाह होने के बावजूद जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने कभी फिजूलखर्ची पर रोक नहीं लगाई. आय से अधिक व्यय और कुप्रबंधन के चलते अब परिषद के पास रोजमर्रा के कामकाज संचालित करने के लिए भी फंड नहीं बचा है.
