
छिन्दवाड़ा. राजीव भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय में नीट पेपर लीक को लेकर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। आयोजित वार्ता में कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों ने केन्द्र की भाजपा सरकार को जमकर घेरते हुए कहा कि बड़ी-बड़ी बातें और दावे करने वाली भाजपा एक परीक्षा भी सही ढंग से आयोजित नहीं करा पाती। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीटÓ में हुई गड़बडिय़ों, पेपर लीक और धांधली के लिए केन्द्र की भाजपा सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है। इस घोटाले से देश की सबसे भरोसेमंद परीक्षा की साख पूरी तरह खत्म हो गई हैं, जिससे देश के लाखों छात्रों और उनके माता-पिता व अभिभावकों का भरोसा टूटा है। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष विश्वनाथ ओकटे ने आयोजित वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा भाजपा सरकार की पहचान पेपर लीक,प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और भ्रष्ट तंत्र से हो रही। बच्चे सालों-साल दिन-रात जागकर कड़ी मेहनत करते हैं। लेकिन मौजूदा परीक्षा सिस्टम में बैठे भ्रष्ट लोगों और अव्यवस्थाओं ने इन होनहार युवाओं के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ कांग्रेस किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। देश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय होनी चाहिए। परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखना सरकार का काम है, जिसमें वह पूरी तरह से बार-बार फेल हो रही। परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचाने से पहले ही पेपर का आम लोगों के हाथों में पहुंचना भ्रष्ट तंत्र की सबसे बड़ी निशानी है। आयोजित वार्ता में छिंदवाड़ा विधानसभा प्रभारी गोविंद राय, सौंसर विधायक विजय चौरे, चौरई विधायक सुजीत चौधरी, पांढुर्ना विधायक निलेश उइके , जुन्नारदेव विधायक सुनील उईके उपस्थित रहे।
देश की शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल : सुनील उईके ००००००००
प्रेसवार्ता के दौरान जुन्नारदेव विधायक सुनील उइके ने कहा देश शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री ने इस विषय पर एक बार भी खुलकर बात नहीं की। प्रधानमंत्री को नीट पेपर लीक, एनटीए की कार्यप्रणाली और शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी पर मीडिया के सामने जवाब दें। परीक्षा पर बात, मन की बात, लेकिन पेपर लीक पर कोई बात नहीं। नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द होने से परीक्षार्थियों में बढ़े तनाव और हताशा के चलते देश के 12 छात्रों ने खुदकुशी कर ली। यह सीधे तौर पर भाजपा सरकार के द्वारा की गई हत्या है। भाजपा सरकार की मंशा साफ है परीक्षाओं में घोटाले, शिक्षा व्यवस्था में घोटाला, प्रतियोगी परीक्षाओं में भी घोटाला। युवाओं को इतना हताश कर दो की वह रोजगार मांगने की स्थिति में ना रहे। शिक्षा व्यवस्था को इतना बर्बाद कर दो कि शिक्षित युवा ही नहीं रहेंगे तो बेरोजगारी की समस्या जड़ से समाप्त हो जाए ।
