आपातकाल का इतिहास दोहराया ना जाए इसका रखें ध्यान: स्मृति ईरानी

नयी दिल्ली 26 जून (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा है कि इतिहास की फितरत होती है, वह अपने आप को दोहराता है, इसलिए लोगों को इस बात की ध्यान रखना होगा कि आपातकाल का इतिहास दोहराया ना जाए। आपातकाल के 51 वर्ष पूरा होने के मौके पर यहां दिल्ली भाजपा की ओर से आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए श्रीमती ईरानी ने कहा कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के सानिध्य में आयोजित यह कार्यक्रम विशेष जिसमें खासकर युवाओं को बुलाया गया है ताकि वह हकीकत से परिचित हो और उन सेनानियों से मिले जिन्होंने आपातकाल की यातनाएं सही और लोकतंत्र को कुचलने वाली ताकतों के खिलाफ आवाज उठायी। उन्होंने कहा, “जनता को हमें इस बात के लिए सचेत करना चाहिए कि जिनके हाथों में आपातकाल में सत्ता थी, अगर वे दोबारा शासन में आए गये, तो किस प्रकार से संविधान की हत्या करेंगे। श्रीमती ईरानी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, ” जिन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी संविधान की हत्या की, अगर सत्ता उनके पास फिर से चली जाए तो वह क्या हश्र करेंगे, इसका प्रमाण हम पहले देख चुके हैं। वह संसद में सड़क पर भ्रांतियां फैलाते हैं और बताने की कोशिश करते हैं कि वही संविधान के सच्चे संरक्षक है। इसलिए युवाओं को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि आपातकाल में क्या हश्र किया गया।”

इस दौरान उन्होंने संसद में घटित हुई दो घटनाओं का उल्लेख किया और कहा कि देश के संसद में शायद ही पहले ऐसी घटना हुई हैं कि यह व्यक्ति केरल राज्य से हैं और उनका नाम सी सदानंदन मास्टर है, जिन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी को चैलेंज देने की दुस्साहस की और उन्हें अपने पैरों को गंवाना पड़ा। उन्होंने कहा कि वह कम्यूनिस्ट पार्टी जो कभी केन्द्र में कांग्रेस का रक्षक बनकर खड़ी रहती थी और श्री सदानंदन की आवाज को बंद करने के लिए उनके पैरों को काट दिये। उन्होंने हाल ही अपने कृत्रिम पैरों को राज्यसभा में पेज पर रख दिया था। देश के संसद में ऐसा भयावह चित्र साक्षात प्रमाण है। उन्होंने कहा, “ऐसे कई कार्यकर्ताओं और व्यक्तियों से मैं मिली हूं जिनके पैर और एक व्यक्ति के हाथ काट दिए गए। यह कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों को वोट देने का नतीजा था जिन्होंने खुद ही बताया था। बंगाल चुनाव के बाद लोगों ने ऐसी कई कहानियां बताई जिसके सुनने के बाद लोगों के रोंगटे खड़े हो गये। यह हाल करती थी कांग्रेस की सहयोगी पार्टियां जिनकी प्रशंसा एक समय कांग्रेस किया करती रही।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आपातकाल के संबंध में जब भी चर्चा होती है तो यह जिक्र जरूर होता है कि एक करोड़ से ज्यादा नसबंदी हुई थी और यह तो सिर्फ वह आंकड़ा है जो लोगों के ध्यान में आया है। हरियाणा के एक गांव ने जब इसका विरोध किया तो उस गांव की 26 दिनों तक बिजली काटी गयी और एक एक मर्द को पकड़कर नसबंदी कर दी गयी। पूरे गांव की नस्लें बर्बाद कर दी गई। इस दौरान 2,20,000 लोगों को जेल में डाला गया। श्री जॉर्ज फर्नांडिस को बुरी तरह से पीटा गया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान महिलाओं के साथ क्या क्या हुआ इसकी जिक्र तक नहीं है। औरतों के साथ किए गए अत्याचार को तो आपातकाल के इतिहास के पन्नो से ही हटा दिया गया। यह लोग जो आज महिलाओं की राजनीति की बात करते हैं, उन्हें उस वक्त पूछना चाहिए था कि आपातकाल के दौरान आपने औरतों के साथ क्या क्या किया। श्रीमती ईरानी ने कहा कि औरतों को लेकर आज भी कांग्रेस और सहयोगी पार्टिंयों की मानसिकता सामने आई है जब बात 33 प्रतिशत आरक्षण की हुयी तो इन्होंने इसका विरोध किया। भाजपा का यही ताकत है कि उसके संघर्षों का हम सम्मान करते हैं और आज एक प्रण लेना होगा कि जो पहले हुआ वह देश में कभी नहीं होगा।

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