छत्तीसगढ़ में यूसीसी की दिशा में बड़ा कदम, मसौदा तैयार करने को पांच सदस्यीय समिति गठित

रायपुर, 26 जून (वार्ता) छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए इसके अध्ययन, सुझाव और प्रारूप तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने गुरुवार रात आदेश जारी किया है।

जारी आदेश के अनुसार, समिति की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। समिति के अन्य सदस्यों में शत्रुघ्न सिंह, एमके राउत, मोहन पवार और ज्योति रानी सिंह शामिल हैं।

समिति को राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके तहत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण तथा अन्य नागरिक मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों और विभिन्न धर्मों के पर्सनल लॉ का परीक्षण कर आवश्यक सुझाव दिए जाएंगे।

सरकार ने समिति को नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही उन राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन भी किया जाएगा, जहां समान नागरिक संहिता लागू है अथवा इस दिशा में पहल की जा चुकी है।

समिति अध्ययन के बाद यूसीसी का प्रारूप तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगी तथा आवश्यक विधायी एवं प्रशासनिक सुझाव भी देगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, “सरकार व्यापक अध्ययन और सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी।”

यूसीसी लागू होने की स्थिति में प्रदेश में सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण जैसे व्यक्तिगत मामलों में एक समान नागरिक कानून लागू होगा, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से संबंधित हों। वर्तमान में विभिन्न समुदाय इन विषयों में अपने-अपने पर्सनल लॉ का पालन करते हैं। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य अलग-अलग पर्सनल लॉ से उत्पन्न भेदभाव को समाप्त करना तथा महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार सुनिश्चित करना है।

देश में उत्तराखंड पहला राज्य है, जहां समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है। वहीं गुजरात ने मार्च 2026 तथा असम ने मई 2026 में यूसीसी विधेयक पारित किया है। इसके अतिरिक्त गोवा में पुर्तगाली शासनकाल से लागू गोवा सिविल कोड (पुर्तगाली सिविल कोड-1867) प्रभावी है, जो 1961 में गोवा के भारत में विलय के बाद भी जारी रहा। हालांकि इसमें कुछ समुदायों के लिए विशेष प्रावधान होने के कारण इसे पूर्ण आधुनिक यूसीसी नहीं माना जाता।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में राज्य सरकार की इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ भी उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो सकता है, जो समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं।

 

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