नयी दिल्ली, 26 जून (वार्ता) प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन बंगलादेश (जेएमबी) के 11 संदिग्धों के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप में असम में गुवाहाटी की विशेष एनआईए अदालत के समक्ष आरोपपत्र दाखिल किया है। एनआईए की जांच से पता चला कि इन आरोपियों ने जेबीएम के ही एक और रूप इमाम महमूदूर काफिला (आईएमके) की साजिश में सक्रिय रूप से साथ दिया था। इस साजिश का मकसद पश्चिम बंगाल समेत असम और त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में इस आतंकवादी संगठन की विचारधारा फैलाना था।
इस साजिश में आतंकवादी संगठन के कट्टरपंथी एजेंडे को बढ़ावा देना, संवेदनशील युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और देश में संगठन के नेटवर्क का विस्तार करना शामिल था। आतंकवाद विरोधी संगठन की जांच से पता चला कि जेबीएम के वरिष्ठ सदस्य इमाम महमूद हबीबुल्लाह ने भारतीय धरती पर प्रतिबंधित संगठन के एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए आईएमके की स्थापना की थी। एनआईए की जांच में यह भी खुलासा हुआ था कि आरोप पत्र में शामिल 11 आरोपियों ने गुप्त बैठकें, धार्मिक प्रचार कार्यक्रम, चरमपंथी साहित्य के वितरण और देश विरोधी प्रचार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर भारत में आईएमके/जेबीएम की उपस्थिति बढ़ाने की साजिश रची थी।
वे आईएमके/जेबीएम के नेतृत्व के प्रति निष्ठा को बढ़ावा दे रहे थे। आरोप पत्र में शामिल दो मुख्य आरोपियों की पहचान नसीमुद्दीन और जागीर मिया के रूप में हुई है, जो क्रमश: असम तथा त्रिपुरा में आईएमके की गतिविधियों का नेतृत्व कर रहे थे। जांच में एनआईए ने आपत्तिजनक दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड की एक शृंखला का पता लगाया, जिनका उपयोग आरोपियों के खिलाफ मामला तैयार करने के लिए किया गया।

