बैरिकेड हारे,भीड़ जीती… अंचल का गुस्सा कलेक्ट्रेट तक पहुंचा

रतलाम। बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार के नेतृत्व में सैलाना क्षेत्र से निकले किसान, युवा और ग्रामीण प्रशासन की तमाम रोक-टोक को पार करते हुए कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार तक पहुंच गए। करीब 20 किलोमीटर दूर से शुरू हुआ यह मार्च केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि आदिवासी अंचल की समस्याओं के खिलाफ खुला शक्ति प्रदर्शन बन गया। प्रशासन ने बंजली और अंबेडकर सर्किल सहित कई स्थानों पर भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग लगाकर रैली रोकने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों का हुजूम आगे बढ़ता रहा। कई बैरिकेड हटाए गए और आखिरकार पुलिस को कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर अंतिम सुरक्षा घेरा बनाना पड़ा। मुख्य द्वार के बाहर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और कलेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गए। आंदोलनकारियों का कहना था कि आदिवासी क्षेत्रों की समस्याएं वर्षों से अनसुनी की जा रही हैं।

विधायक ने 48 सूत्रीय ज्ञापन से समस्याएं गिनाई

विधायक डोडियार ने 48 सूत्रीय ज्ञापन के माध्यम से आदिवासी भूमि अधिग्रहण, खाद-बीज संकट, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, शिक्षा व्यवस्था की कमियों और रतलाम निवेश क्षेत्र के विरोध सहित कई मुद्दे उठाए। अंतत: एडीएम बृजेंद्र रावत और ग्रामीण एएसपी विवेक कुमार लाल को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन समाप्त जरूर हुआ, लेकिन आदिवासी अंचल ने साफ संकेत दे दिया कि अब विकास और अधिकारों के मुद्दों पर संघर्ष और तेज होगा।

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