हमीरपुर, 24 जून (वार्ता) लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने बुंदेलखंड क्षेत्र में संचालित कोचिंग संस्थानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
चित्रकूटधाम एवं झांसी मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) राजू राणा ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को निर्देश दिए हैं कि वे जिलाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर जांच समितियां गठित करें और सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें।
संयुक्त निदेशक ने स्पष्ट कहा कि प्रत्येक कोचिंग संस्थान के पास नेशनल बिल्डिंग कोड (एनबीसी) के अनुरूप प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। जिन संस्थानों के पास यह प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा या जो निर्धारित सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें तत्काल बंद कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि गठित जांच समितियों में अग्निशमन विभाग, विद्युत विभाग, विकास प्राधिकरण और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। समिति कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा, भवन संरचना, आपातकालीन निकास मार्ग, विद्युत सुरक्षा और अन्य आवश्यक मानकों की जांच करेगी।
राजू राणा ने कहा कि कोचिंग संस्थानों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि हमीरपुर जिले में लगभग 150 कोचिंग सेंटर संचालित हैं, जबकि अब तक केवल 23 संस्थानों का पंजीकरण हुआ है। आरोप है कि पंजीकरण के दौरान कई संस्थानों का भौतिक निरीक्षण भी नहीं कराया गया।
संयुक्त निदेशक ने कहा कि उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियमन अधिनियम के तहत सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकृत होना अनिवार्य है। साथ ही किसी भी परिस्थिति में बेसमेंट में कोचिंग संचालन की अनुमति नहीं होगी। निरीक्षण के दौरान जो संस्थान निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाएंगे, उन्हें तत्काल बंद कराया जाएगा और संचालकों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
उन्होंने सभी डीआईओएस को निर्देशित किया है कि वे जिलाधिकारियों से मिलकर संयुक्त जांच समिति का गठन करें और निरीक्षण रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराएं। उन्होंने झांसी और चित्रकूटधाम मंडल के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से विस्तृत आख्या भी तलब की है।
लखनऊ की घटना के बाद क्षेत्र के अधिकांश कोचिंग संस्थानों ने एहतियातन अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए हैं। कई स्थानों पर कोचिंग केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं और संचालक जांच अभियान पर नजर बनाए हुए हैं।
इस बीच कोचिंग संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि अनेक संस्थानों में एक ही कमरे में क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाया जाता है, जिससे आपात स्थिति में दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराना समय की आवश्यकता है।
संयुक्त निदेशक ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित संस्थान तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुरूप सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले कोचिंग संस्थानों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
