सतना: लोक स्वास्थ्य को गंभीर खतरे को देखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है.रघुराजनगर अनुभाग क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नाला,गहरा नाला और अन्य अपशिष्ट जल स्रोतों के पानी से किसी भी प्रकार की सब्जियों एवं खाद्य फसलों की सिंचाई को तत्काल प्रभाव से पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है.आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के अंतर्गत जारी किया गया है, जो आगामी 60 दिनों की अवधि के लिए अथवा न्यायालय द्वारा आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा. आदेश के अनुसार केवल सिंचाई ही नहीं,बल्कि सीवेज और अपशिष्ट जल से उगाई गई फसलों व सब्जियों के परिवहन, भंडारण, विक्रय, प्रदर्शन अथवा किसी भी प्रकार के क्रय-विक्रय पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है.प्रशासन का यह सख्त फैसला मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तकनीकी प्रतिवेदन तथा प्रयोगशाला विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है. जांच रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि उक्त नालों के जल में रोगजनक सूक्ष्मजीव, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और घातक भारी धातुएँ अत्यधिक मात्रा में मौजूद हैं.
डॉक्टरों और विशेषज्ञों के मुताबिक, इस प्रदूषित जल से सिंचित सब्जियों के सेवन से कैंसर, जलजनित महामारियाँ और पेट व लीवर से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियों का सीधा खतरा उत्पन्न हो गया है.प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित क्षेत्र के कृषकों की व्यक्तिगत पहचान कर उन्हें अलग से नोटिस देना इस आपातकालीन स्थिति में व्यावहारिक नहीं था, इसलिए लोक स्वास्थ्य और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह आदेश एकतरफा रूप से पारित किया गया है.
प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति, कृषक, व्यापारी अथवा संस्था के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 तथा अन्य सुसंगत कानूनी धाराओं के अंतर्गत तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.इसके साथ ही प्रशासन ने आम जनता और किसानों से सहयोग की अपील की है कि किसान भाई फसलों के लिए केवल मानक के अनुरूप उपचारित जल का ही उपयोग करें और आम नागरिक बाजारों में मिलने वाली संदिग्ध या गंदे पानी से उगी दिखने वाली सब्जियों को खरीदने और बेचने से बचें ताकि अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके।
