
छिंदवाड़ा. अमरवाड़ा तहसील के ग्राम कहुआ और छिंदवाड़ा जनपद के ग्राम उभेगांव में ग्रामीण दूषित पानी पनीने को मजबूर हो रहे है. इस दोनों गावों में पेयजल की भारी किल्लत हो गई है. यहां पर नल जल योजना दम तोड़ रही है. पेय जल की मांग को ग्राम कहुआ की महिलाएं खाली गुंडी लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची तो दूसरी ओर ग्राम उभेगांव के ग्रामीण जन भी पानी की समस्या को लेकर कलेक्टे्रट पहुंचे. ग्राम कहुआ की महिलाओं ने आरोप लगाया कि गांव में पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं. ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि गांव में संचालित नल-जल योजना लंबे समय से बंद पड़ी हुई है. योजना के तहत नियमित जल आपूर्ति नहीं हो रही, जिसके कारण लोगों को नदी-नालों और अन्य असुरक्षित जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराए गए जलस्रोत भी प्रभावी नहीं हैं और केवल दिखावे तक सीमित हैं. महिलाओं के अनुसार कई बार समस्या के समाधान के लिए कई बार पंचायत स्तर पर शिकायत की गई, लेकिन स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरपंच और सचिव की मनमानी तथा लापरवाही के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. समय पर मरम्मत और वैकल्पिक जल व्यवस्था नहीं किए जाने से लोगों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है. महिलाओं ने बताया कि मजबूरी में दूषित पानी का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे बच्चों और अन्य लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.
उबेगांव पंचायत: 15 दिन में महज आधा घंटे मिलता है पानी ०००० ००००
छिंदवाड़ा जनपद की ग्राम पंचायत उबेगांव में पेयजल आपूर्ति ठप होने से ग्रामीण परेशान हैं. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें हर 15 दिन में महज आधे घंटे के लिए पानी मिलता है, जिससे गर्मी की इन दिनों में जीवन दूभर हो गया है. पंचायत के पास चार बोरवेल, दो कुएँ और दो हैंडपंप उपलब्ध हैं, परंतु बिजली कनेक्शन कट जाने और रख-रखाव न होने के कारण ये स्रोत ठप पड़े हैं. तीन चार महीने से बिजली विभाग ने बिल न भरने के कारण तीन कनेक्शन काट दिए हैं. बिजली कटौती के बाद पेयजल आपूर्ति करने वाली पम्पें नहीं चल पा रहीं है. ग्रामीण एक से दो किलोमीटर दूर जाकर पानी ढोने को मजबूर हैं. प्रधानमंत्री नल-जल योजना के तहत दिए गए पाइपलाइन कार्य भी अधूरे पड़े हैं, सचिव मोहन डेहरिया पर ग्रामीणों ने आरोप लगया है कि सचिव ने मरम्मत के नाम पर 21 लाख रुपए निकाल लिए, परंतु कोई वास्तविक मरम्मत कार्य नहीं कराया गया. सचिव द्वारा एक किराये का कुआं भी लिया गया था, जिसका 9,000 रुपए किराया अभी तक नहीं चुकाया गया. इसी कुएं से लगभग 9 लाख 35 हजार रुपए की पाईप लाइन बिछाई गई, फिर भी यह लाइन वर्तमान में उपयोगी नहीं है.
