भारत ने उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढाने का आह्वान किया

नयी दिल्ली 23 जून (वार्ता) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने “गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों”, बढ़ते संघर्षों और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने में पारंपरिक वैश्विक संस्थानों की भूमिका को अपर्याप्त बताते हुए ब्रिक्स देशों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया है।

श्री डोभाल ने बुधवार को यहां 16 वीं ब्रिक्स बैठक में सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ संवाद करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन का स्वागत करते हुए कहा कि इससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनेगी। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रम का भी स्वागत किया और कहा कि इससे आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं को कम करने और उर्वरकों और रसायनों जैसी प्रमुख वस्तुओं की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, क्षेत्र में नेविगेशन की अधिक स्वतंत्रता वैश्विक आर्थिक स्थिरता और समृद्धि का समर्थन करेगी।

बैठक की शुरुआत करते हुए श्री डोभाल ने कहा कि दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक तनाव और तेजी से तकनीकी परिवर्तन के कारण “बहुत उथल-पुथल भरे समय” से गुजर रही है। उन्होंने कहा, “सैन्य संघर्षों और जटिल सुरक्षा समस्याओं से जूझ रही दुनिया भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आर्थिक तनाव और विघटनकारी प्रौद्योगिकी का सामना कर रही है। न केवल खतरे बढ़ रहे हैं, बल्कि उपकरण और संस्थागत तंत्र इन संघर्षों को हल करने या कम करने के लिए खुद को अपर्याप्त पा रहे हैं। बहुपक्षवाद गिरावट पर है।”

विदेश मंत्रालय ने बताया कि ब्रिक्स सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों/प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों ने दुनिया के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। गैर-पारंपरिक क्षेत्र में, उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा, आतंकवादी नेटवर्क द्वारा उपयोग की जाने वाली उभरती प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा और जलवायु-प्रेरित अस्थिरता से संबंधित चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।

बैठक में आतंकवाद-निरोध पर और सूचना तथा संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग में सुरक्षा पर आयोजित ब्रिक्स संयुक्त कार्य समूहों की गतिविधियों और परिणामों की भी समीक्षा की। नेताओं ने ब्रिक्स सहयोग को और बढ़ाने के लिए समर्थन का विश्वास दिया विशेष रूप से सदस्यों की क्षमताओं को मजबूत करने, सूचना साझा करने में वृद्धि और ब्रिक्स के बीच समन्वय पर। उन्होंने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जिसमें उनके द्वारा उपयोग की जा रही नयी प्रौद्योगिकियों के उपयोग का मुकाबला करना भी शामिल है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” विषय के तहत भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। बैठक के समापन के बाद सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

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