भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून की धीमी रफ्तार चिंता का कारण बनती जा रही है। जून का अधिकांश समय बीत जाने के बावजूद प्रदेश में अब तक सामान्य से 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसका सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है और कई जिलों में किसान बुवाई के लिए अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 48 जिले सामान्य बारिश से पीछे चल रहे हैं, जबकि केवल कुछ जिलों में औसत से अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश की कमी सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। वहीं पश्चिमी हिस्से में भी सामान्य से कम बारिश हुई है।
हालांकि मंगलवार को बड़वानी और खरगोन में तेज बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली। इससे पहले भोपाल, सीहोर, रायसेन, धार, इंदौर और कई अन्य जिलों में भी प्री-मानसूनी बारिश देखने को मिली थी। लेकिन मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि फसलों की बुवाई और जलस्तर में सुधार के लिए अभी और अच्छी बारिश की जरूरत है।
