आठ माह की सुस्ती के बाद पंचायतों को नई उम्मीद

बड़वानी,जिले की 409 ग्राम पंचायतों में 1 जुलाई से लागू होने जा रही जी राम जी योजना को लेकर सरपंचों और ग्रामीणों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

लंबे समय से मनरेगा के तहत नए कार्य नहीं मिलने और करोड़ों रुपए के भुगतान अटके रहने से पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार थम सी गई थी। अब नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतें और ग्राम सभाएं स्वयं अपने विकास कार्य तय करेंगी। इससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनाने का रास्ता खुलेगा।

जिला पंचायत स्तर पर इसकी तैयारियां तेज हो गई हैं और पंचायतों से विकास कार्यों के प्रस्ताव भी लिए जा रहे हैं। सरपंचों का मानना है कि यदि समय पर बजट मिला तो पंचायत क्षेत्रों में रुके हुए निर्माण कार्य फिर गति पकड़ेंगे। नई व्यवस्था को ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ग्रामसभा तय करेगी विकास की दिशा

नई योजना की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि अब विकास कार्य ऊपर से थोपे नहीं जाएंगे, बल्कि ग्राम सभा स्वयं प्राथमिकताएं तय करेगी। सरपंच, सचिव और पंच मिलकर गांव की जरूरतों के अनुसार कार्यों का चयन करेंगे। योजना में पक्के निर्माण कार्यों को भी शामिल किया गया है। जिले की 125 से अधिक पंचायतों ने अपने प्रस्ताव और विकास खाका तैयार कर जिपं को भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार पहले चरण में सभी पंचायतों में कार्य प्रारंभ कराने की तैयारी है। योजना के तहत रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गांवों में जल संरक्षण, सडक़, सामुदायिक परिसंपत्तियों तथा अन्य आवश्यक विकास कार्यों को गति मिलेगी। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि कई महीनों से विकास कार्य ठप थे, ऐसे में नई योजना से नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

जल संरक्षण और कृषि सुधार पर रहेगा फोकस

जी राम जी योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को मजबूत करना है। योजना के तहत जल संरक्षण, खेत तालाब, सरोवर निर्माण और भू-जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त वित्तीय सहयोग से पंचायतों को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाएगा। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियां तैयार करने में मदद मिलेगी।

भुगतान अटका, पंचायतों की बढ़ी परेशानी

जिले में मनरेगा के तहत करोड़ों रुपए का भुगतान अभी भी लंबित है। कई पंचायतों में खेत तालाब, मुक्तिधाम, नाले, सडक़ और सम्पर्क मार्गों के निर्माण कार्यों का पैसा अटका हुआ है। सरपंच लगातार जनपद और जिला पंचायत कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। बजट नहीं मिलने से कई पंचायतों ने नए कार्य शुरू ही नहीं किए। ऐसे में नई योजना के साथ लंबित भुगतानों के निराकरण की मांग भी तेज हो गई है।

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