
जबलपुर। री – नीट परीक्षा रविवार को 23 परीक्षा केन्द्रों पर हुई। री-नीट की परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5.15 बजे तक हुई। परीक्षा की कुल अवधि सवा तीन घंटे की रही। कुल 10441 परीक्षार्थियों में से 8693 ने परीक्षा दी है जबकि 1748 अनुपस्थित रहे। इस बार सभी परीक्षार्थियों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया। बायोमैट्रिक मशीन, सीसीटीवी कैमरे एवं जैमर समेत अन्य सुरक्षा के सख्त पहरे में परीक्षा हुई। इसके साथ ही भविष्य के डॉक्टरों की किस्मत कैद हो गई है। परीक्षा समाप्त होने के बाद जैसे ही छात्र परीक्षा केंद्रों से बाहर निकले, वहां का नजारा बेहद भावुक और दिलचस्प था। महीनों की तपस्या और रातों की नींद कुर्बान करने के बाद परीक्षार्थियों के चेहरों पर मिले-जुले भाव साफ देखे जा सकते थे। कहीं खुशी की लहर, तो कहीं मायूस चेहरे दिखे । जिन छात्रों की तैयारी पुख्ता थी, वे परीक्षा केंद्र से बाहर आते ही अपनी खुशी रोक नहीं पाए। उनके चेहरों पर बड़ी सी मुस्कान थी। इसके ठीक विपरीत, कई छात्रों के चेहरे पूरी तरह मुरझाए हुए थे। अभिभावक बच्चों का चेहरा देखकर ही पेपर का हाल भांप रहे थे। ढांढस भी बंधाया गया कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, यह आखिरी मौका नहीं है।
दूर-दराज से पहुंचे अभ्यर्थी, डायवर्जन ने बढ़ाई चिंता
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जबलपुर प्रवास के बीच री-नीट परीक्षा हुई। प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी थी। एक ओर वीवीआईपी मूवमेंट को लेकर शहर में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, वहीं दूसरी ओर हजारों परीक्षार्थियों को समय पर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाना भी बड़ी जिम्मेदारी थी। नवभारत की टीम द्वारा पड़ताल में देखने को मिला कि कई अभिभावकों और विद्यार्थियों को यातायात डायवर्जन एवं वन-वे व्यवस्था के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। कटनी, उमरिया, गाडरवारा, नरसिंहपुर, मंडला और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में परीक्षार्थी अपने अभिभावकों के साथ जबलपुर पहुंचे। राष्ट्रपति के दौरे के चलते शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्जन लागू किया गया था। बाहरी जिलों से आए कई अभिभावकों को इन मार्ग परिवर्तनों की पूरी जानकारी नहीं थी, जिसके कारण उन्हें बार-बार रास्ता पूछना पड़ा । कुछ वाहन चालकों को निर्धारित मार्ग बंद मिलने पर वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा या घूम कर आना पड़ा।
समय से पहले केंद्रों में उपस्थित दिखे अभ्यर्थी :
शहर में रविवार को एक साथ दो बड़े आयोजनों के चलते दिनभर हलचल का माहौल रहा। एक ओर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन और योग दिवस कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही, वहीं दूसरी ओर री-नीट-यूजी परीक्षा के कारण विभिन्न परीक्षा केंद्रों के बाहर सुबह से ही अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की भीड़ देखने को मिली। यातायात व्यवस्था में बदलाव के चलते अधिकांश परीक्षार्थी निर्धारित समय से काफी पहले ही केंद्रों पर पहुंच गए। यातायात व्यवस्था को देखते हुए अधिकांश अभ्यर्थी निर्धारित समय से काफी पहले ही परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए थे। कई परिवार सुबह तडक़े ही अपने गृह जिलों से निकल गए थे ताकि किसी भी संभावित देरी से बचा जा सके। परीक्षा शुरू होने के बाद कई अभिभावक घंटों तक केंद्रों के बाहर इंतजार करते रहे। कुछ अभिभावक पेड़ों की छांव में बैठे दिखाई दिए तो कुछ आसपास की दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर समय बिताते नजर आए। बच्चों के भविष्य से जुड़ी इस महत्वपूर्ण परीक्षा को लेकर उनके चेहरों पर चिंता और उम्मीद दोनों साफ दिखाई दे रही थीं।
ट्रैफिक जाम से जूझे
नीट-यूजी परीक्षा के दौरान शहर में ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के चलते कई मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रतिबंध लागू थे, वहीं हजारों परीक्षार्थियों के परीक्षा केंद्रों की ओर पहुंचने से कई स्थानों पर जाम की स्थिति बन गई। समय पर केंद्र पहुंचने की चिंता में अभ्यर्थी और उनके परिजन सुबह से ही परेशान नजर आए। महाकौशल कॉलेज सहित अन्य परीक्षा केंद्रों के बाहर बड़ी संख्या में वाहन पहुंचने से सडक़ें संकरी पड़ गईं। कई अभिभावकों को वाहन दूर खड़े कर पैदल ही केंद्र तक पहुंचना पड़ा। परीक्षा शुरू होने के बाद भी केंद्रों के बाहर लोगों की भीड़ बनी रही और अभिभावक बच्चों के बाहर आने का इंतजार करते रहे।
