​70 वर्षों से योग साधना कर रहे योगाचार्य विष्णु आर्य, आज भी सिखा रहे स्वस्थ जीवन का मंत्र

सागर: उम्र के 90 का दशक पार कर चुके, अद्भुत ऊर्जा और कड़े अनुशासन की मिसाल बने जिले के वरिष्ठ योगाचार्य विष्णु आर्य 93 वर्ष की उम्र में भी पूरी सक्रियता के साथ लोगों को योग सिखा रहे हैं। पिछले 70 वर्षों से योग साधना में जुटे विष्णु आर्य न केवल योग प्रशिक्षण दे रहे हैं, बल्कि योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवन की राह भी दिखा रहे हैं। सागर में स्थापित उनके ‘योग निकेतन’ में आज भी सैकड़ों लोग योग सीखने पहुंचते हैं।
​बिना ऑपरेशन जुड़ गई कूल्हे की हड्डी, दृढ़ इच्छाशक्ति से की वापसी
​हाल ही में दिसंबर 2025 में कूल्हे की हड्डी टूटने के कारण योगाचार्य विष्णु आर्य अस्वस्थ हो गए थे और करीब ढाई महीने तक बेड रेस्ट पर रहे। लेकिन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति, नियमित उपचार और योग अनुशासन का ही चमत्कार था कि बिना किसी ऑपरेशन के उनकी हड्डी जुड़ गई। अब वे पूरी तरह स्वस्थ होकर फिर से योग साधना और प्रशिक्षण में जुट गए हैं। इन दिनों वे वाकर के सहारे चलकर संस्थान पहुंचते हैं, खुद भी योगाभ्यास करते हैं और दूसरों को भी सिखाते हैं। आगामी 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ की तैयारियों के तहत वे सागर स्थित योग निकेतन संस्थान में लोगों को नियमित योगाभ्यास करा रहे हैं।
​1968 में रखी थी ‘योग निकेतन’ की नींव
​विष्णु आर्य ने वर्ष 1968 में सागर में ‘योग निकेतन’ की स्थापना की थी, जो बिहार के मुंगेर में स्थित प्रसिद्ध योग केंद्र ‘शिवानन्द मठ’ की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। मध्यप्रदेश योग परिषद और मध्यप्रदेश आयुर्वेद सम्मेलन के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके विष्णु आर्य ने आर्मी स्कूल और पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में भी योग प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं दी हैं। उनके केंद्र में कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए पहुंचते हैं। उनका दावा है कि नियमित योग से डायबिटीज, अस्थमा, सर्वाइकल, सायटिका और मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्याओं में अद्भुत राहत मिलती है।
​1954 से शुरू हुआ सफर, स्वामी सत्यानंद से ली दीक्षा
​अपने सफर के बारे में बताते हुए विष्णु आर्य कहते हैं कि उन्हें बचपन से ही योग, व्यायाम और अखाड़े का शौक था। वर्ष 1954 में आर्य समाज के संतों के संपर्क में आने के बाद योग के प्रति उनकी रुचि बढ़ी। इसके बाद, वर्ष 1968 में रायगढ़ में आयोजित विश्व योग सम्मेलन में उन्होंने स्वामी सत्यानंद सरस्वती से योग दीक्षा प्राप्त की और उनके साथ देशभर में भ्रमण कर लोगों को योग सिखाया। उनका मानना है कि:
​”योग केवल आसन और प्राणायाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक कला और विज्ञान है। आज के दौर में बढ़ता मानसिक तनाव, नशे की प्रवृत्ति और बदलती जीवनशैली लोगों को बीमार बना रही है, जबकि योग मानसिक और शारीरिक संतुलन स्थापित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।”
​राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुके हैं कई बड़े सम्मान
​योग के क्षेत्र में सात दशकों के लंबे योगदान के लिए विष्णु आर्य को अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें मध्यप्रदेश सरकार के ‘रामजी महाजन पुरस्कार’ और राज्य सरकार के ‘स्वामी विवेकानंद योग पुरस्कार’ से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा, पिछले वर्ष केंद्र सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से संबद्ध संगठन Yogasana Bharat द्वारा गोवा में आयोजित राष्ट्रीय खेल महोत्सव के दौरान उन्हें ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
​कई मुख्यमंत्रियों ने किया सम्मानित, योग दिवस को लेकर उत्साह
​उम्र का शतक लगाने की इच्छा रखने वाले योगाचार्य विष्णु आर्य की उपलब्धियों के लिए मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह, मोतीलाल वोरा, शिवराज सिंह चौहान और वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अनेक राजनीतिक व सामाजिक संगठन उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।
​अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर वे बेहद उत्साहित हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से योग को वैश्विक पहचान मिली है और 21 जून को दुनिया भर में लोग योग को अपनाकर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

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