नयी दिल्ली, 19 जून (वार्ता) भारत और उज्बेकिस्तान शुल्क से इतर व्यापार बाधाओं को दूर करने और अगले तीन साल में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने की दिशा में काम करने के लिए सहमत हुए हैं।
उज़्बेकिस्तान के अनुसार, साल 2025 में भारत के साथ उसका व्यापारिक कारोबार 1.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो एक साल पहले की तुलना में 33.3 प्रतिशत अधिक है। उज़्बेकिस्तान का भारत को निर्यात 25.4 प्रतिशत बढ़कर 16.46 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया। भारत से उसके आयात में 34.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 1.15 अरब डॉलर रहा।
भारत-उज़्बेकिस्तान अंतर-सरकारी आयोग के व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग संबंधी 14वें सत्र में शुक्रवार को दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की और परस्पर व्यापार बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की।
बैठक का आयोजन ताशकंद में किया गया। भारत की ओर से वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल और उज़्बेकिस्तान के निवेश, उद्योग एवं व्यापार उपमंत्री शोखरुख गुलामोव ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। श्री अग्रवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसमें भाग लिया।
आयोग ने उन कई उत्पाद श्रेणियों पर चर्चा की जिनमें उज़्बेकिस्तान को भारतीय आपूर्ति बढ़ायी जा सकती है। इनमें औषधियां, चिकित्सा उपकरण, कृषि उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, कृषि मशीनरी, इंजीनियरिंग सामान, विद्युत मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो-पुर्जे, ट्रैक्टर के साथ काम में आने वाले उपकरण, वस्त्र एवं वस्त्र मशीनरी, रसायन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा सेवाएं, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स तथा अन्य व्यावसायिक सेवाएं शामिल हैं।
वाणिज्य सचिव ने कहा कि अनुमोदन, मानकों, परीक्षण, प्रमाणन, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं और बाजार पहुंच संबंधी गैर-शुल्क बाधाओं की नियमित समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यवसायों को नीतिगत स्थिरता चाहिये, नियामकों को संवाद की आवश्यकता है और मानक निर्धारण संस्थाओं के बीच सीधा संपर्क होना चाहिये।
दोनों पक्षों ने माना कि मजबूत परिवहन और लॉजिस्टिक्स संपर्क दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की पूर्ण क्षमता को साकार करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उज़्बेकिस्तान ने डिजिटल लॉजिस्टिक्स प्लेटफ़ॉर्म और सीमा शुल्क सुविधा तंत्रों के अनुभव साझा करने का प्रस्ताव रखा।
वाणिज्य सचिव ने उज़्बेकिस्तान के कारोबारियों को भारत में होने वाले व्यापार मेलों, निवेश मंचों और क्षेत्रीय आयोजनों में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। दोनों देशों ने वाणिज्य मंडलों, निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्यमों और क्षेत्रीय संगठनों के बीच निकट सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की।
दोनों पक्षों ने फार्मास्यूटिकल क्षेत्र को प्राथमिकता वाला क्षेत्र स्वीकार किया। भारत ने सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयों, टीकों तथा सक्रिय औषधीय अवयवों की आपूर्ति करने की अपनी क्षमता पर प्रकाश डाला।
कृषि एवं संबद्ध उत्पादों के निर्यात, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, कृषि मशीनरी, बीज विकास, कृषि अनुसंधान और जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों में भारत की क्षमताओं को भी उज्बेकिस्तान ने स्वीकार किया।
दोनों देशों ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा डिजिटल सहयोग पर भी चर्चा की। भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, दूरसंचार, फिनटेक, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, डिजिटल शिक्षा, इंजीनियरिंग परामर्श और डिजिटल लॉजिस्टिक्स में अपनी विशेषज्ञता को रेखांकित किया।
भारतीय पक्ष ने सीमा शुल्क डेटा आदान-प्रदान और सुरक्षित एवं कुशल भुगतान के लिए भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर सहयोग का सुझाव दिया, ताकि पर्यटन, व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिल सके।
ऊर्जा क्षेत्र को रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया गया। महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करना भारत-उज़्बेकिस्तान ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने का एक अहम क्षेत्र माना गया।
भारत-उज़्बेकिस्तान अंतर-सरकारी आयोग की 15वीं बैठक भारत में आयोजित होगी।
