इंदौर: भारतीय रेल ने इंदौर यार्ड स्थित आरओबी संख्या 103-सी शास्त्री ब्रिज के पुनर्निर्माण के लिए 139 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है. परियोजना के तहत 72 मीटर लंबे कैमल-बैक सुपर-स्ट्रख्र, पीएससी गर्डरों और वायाडक्ट व्यवस्था सहित आधुनिक 4-लेन रोड ओवर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा.बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए तैयार किए जा रहे इस पुल के नीचे दोनों ओर 6-6 मीटर चौड़ी सर्विस रोड भी बनाई जाएंगी, जिससे ट्रैफिक जाम कम होगा और स्थानीय आवागमन सुगम बनेगा.
परियोजना में सीवर लाइन के स्थानांतरण व उन्नयन, नई जल निकासी व्यवस्था तथा विद्युत अवसंरचना के आधुनिकीकरण का कार्य भी शामिल है. नए बिजली खंभे और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था स्थापित की जाएगी. भारतीय रेल के अनुसार, शास्त्री ब्रिज के पुनर्निर्माण से इंदौर में सड़क-रेल संपर्क बेहतर होगा, यातायात बाधाएं कम होंगी और नागरिकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिलेगी. यह परियोजना शहर की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
इंदौर की रीढ़ की तरह कार्य किया
शास्त्री ब्रिज इंदौर शहर का पहला प्रमुख रेलवे ओवरब्रिज माना जाता है, जिसका निर्माण वर्ष 1953 में पूरा हुआ था. यह पुल शहर के यातायात विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ और लंबे समय तक इंदौर की ‘रीढ़’ की तरह कार्य करता रहा. इसका उद्घाटन 12 जनवरी 1953 को तत्कालीन रेल एवं परिवहन मंत्री (और बाद में भारत के प्रधानमंत्री) लाल बहादुर शास्त्री द्वारा किया गया था. उन्हीं के नाम पर इस पुल का नाम ‘शास्त्री ब्रिज’ रखा गया. स्थानीय इंजीनियरों द्वारा डिज़ाइन और निर्मित यह पुल उस समय की तकनीकी क्षमता और शहरी योजना का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है. लगभग 1 करोड़ रुपए की लागत से बना यह पुल दशकों तक इंदौर के यातायात को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है
