14 लाख का चेक डैम ध्वस्त,विकास की नींव पर सवाल

सिंगरौली । चितरंगी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत चितावल तर्कहरिया में मुख्यमंत्री अधोसंरचना मद से वर्ष 2025-26 में लगभग 14 लाख रुपये की लागत से निर्मित चेक डैम के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जल संरक्षण और ग्रामीण सिंचाई को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाई गई यह संरचना एक वर्ष भी नहीं टिक सकी, जिससे सरकारी धन के उपयोग और निर्माण की गुणवत्ता पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि यदि निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण के अनुरूप हुआ होता तो चेक डैम इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त नहीं होता। ग्रामीणों के अनुसार लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद संरचना का अल्प समय में ध्वस्त होना कई गंभीर सवालों को जन्म देता है। मामले में सहायक यंत्री और उपयंत्री की कार्यप्रणाली भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्यों की मौके पर निगरानी, गुणवत्ता परीक्षण, माप पुस्तिका का सत्यापन और तकनीकी मूल्यांकन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार अधिकारी निर्माण स्थल पर पहुंचे बिना ही दफ्तरों में बैठकर मूल्यांकन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर देते हैं, जिससे निर्माण कार्यों की वास्तविक गुणवत्ता की जांच नहीं हो पाती।

जमकर की गई है कमीशनखोरी

क्षेत्र में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि अधोसंरचना मद के तहत बनने वाले कुछ कार्यों में कमीशनखोरी का खेल लंबे समय से चल रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि निर्माण कार्यों की स्वीकृति से लेकर भुगतान तक कई स्तरों पर अनियमितताओं की आशंका बनी रहती है। इसी कारण अब पूरे क्षेत्र में निर्मित चेक डैम और अन्य संरचनाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि चितावल तर्कहरिया चेक डैम मामले की स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण स्वीकृति, तकनीकी परीक्षण, गुणवत्ता प्रमाणन, माप पुस्तिका और भुगतान संबंधी अभिलेखों की बारीकी से जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित एजेंसियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं की गई तो विकास कार्यों पर जनता का भरोसा कमजोर होता जाएगा।

मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना में गड़बड़ी के आरोप

मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई निर्माण कार्यों का मूल्यांकन मौके पर पहुंचकर करने के बजाय इंजीनियर और उपयंत्री कार्यालय अथवा घर बैठे ही कर रहे हैं, जिससे गुणवत्ता और वास्तविक प्रगति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बिना भौतिक सत्यापन के माप पुस्तिका तैयार कर भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इससे शासन को आर्थिक नुकसान होने की आशंका भी जताई जा रही है। नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित निर्माण कार्यों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

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