सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति के खिलाफ अंतरिम राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

नयी दिल्ली, 18 जून (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की त्रि-भाषा नीति को लागू करने को चुनौती देने वाली याचिका पर कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। यह नयी नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की जानी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने नीति के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने पीपुल फॉर एक्टिव डेमोक्रेसी नामक स्वयंसेवी संस्था की दायर इस याचिका को उन याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 से त्रि-भाषा नीति लागू करने के खिलाफ पहले से ही न्यायालय के समक्ष लंबित हैं। अदालत ने इस मामले को अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई को सूचीबद्ध किया है।

अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए पीठ ने कहा, “हम आज केवल एक पंक्ति का आदेश पारित नहीं कर सकते। इस मामले पर विस्तार से बहस हुई थी। अंतरिम राहत देने का कोई सवाल ही नहीं उठता।”

सुनवाई के दौरान स्वयंसेवी संस्था के वकील ने स्पष्ट किया कि संगठन त्रि-भाषा नीति के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह आगामी शैक्षणिक वर्ष से इसे लागू करने के तरीके पर सवाल उठा रहा है। हल्के-फुल्के अंदाज में, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने संगठन के नाम पर टिप्पणी की और पूछा कि क्या इसका उद्देश्य अदालत या जनता के मन में डर पैदा करना है। वकील ने जवाब दिया कि यह केवल 2013 में स्थापित एक ट्रस्ट का पंजीकृत नाम है।

गौरतलब है कि यह मुद्दा पहले से ही उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन है। इससे पहले 27 मई को, न्यायालय ने अभिभावकों और शिक्षकों द्वारा इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार, सीबीएसई और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को नोटिस जारी किया था। गत 27 मई की सुनवाई में पीठ ने संकेत दिया था कि इसके क्रियान्वयन के व्यावहारिक पहलुओं की बारीकी से जांच करने की आवश्यकता है।

यह विवाद सीबीएसई के 15 मई के परिपत्र से शुरू हुआ है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुपालन में जारी किया गया था। इस संशोधित योजना के तहत, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में प्रवेश करने वाले छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए और तीसरी भाषा विदेशी भाषा हो सकती है।

सीबीएसई का रुख है कि इस नीति का उद्देश्य बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना है और उसने पाठ्यपुस्तकों, शिक्षकों तथा क्रियान्वयन से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदमों की घोषणा की है।

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