मानहानि प्रकरण में उमा भारती की अधिवक्ता को वकालतनामा पेश करने मिली मोहलत

जबलपुर। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के खिलाफ दायर मानहानि प्रकरण में हाईकोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ द्वारा सुनवाई की गयी। याचिका की सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की तरफ से उपस्थित अधिवक्ता रूचिता गोहिल की तरफ से वकालतनामा पेश करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। एकलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 1 जुलाई को निर्धारित की है।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2003 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेत्री उमा भारती ने सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाया था कि उनके संबंध अंडरववर्ल्ड से है। जिसके कारण उसकी सार्वजनिक प्रतिष्ठा का आघात तथा छवि धूमिल हुई है। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उमा भारती को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके अलावा भोपाल एमपी-एमएलए कोर्ट के दायर परिवाद का रिकॉर्ड भी तलब किया था।

याचिका की सुनवाई के दौरान उमा भारती की तरफ से पैरवी कीे लिए अधिवक्ता रूचिता गोहिल उपस्थित हुई। उन्होने एकलपीठ से जवाब पेश करने तथा खुद का वकालतनामा पेश करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया। एकलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 1 जुलाई को निर्धारित की है।

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