बक्सवाहा: छतरपुर जिले के बक्सवाहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलने वाली दो घटनाएं सामने आईं। सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल लाए गए 53 वर्षीय अधिवक्ता सुखदेव प्रजापति को गंभीर हालत में दमोह रेफर किया गया, लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजनों को निजी वाहन से उन्हें लेकर रवाना होना पड़ा। रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। वहीं, एक गर्भवती महिला को भी एंबुलेंस नहीं मिलने पर निजी वाहन से जिला अस्पताल दमोह ले जाना पड़ा।
जानकारी के अनुसार बक्सवाहा निवासी अधिवक्ता सुखदेव प्रजापति न्यायालय परिसर में कार्य कर रहे थे, तभी अचानक उनके सीने में तेज दर्द उठा और वे बेहोश होकर गिर पड़े। साथी अधिवक्ताओं ने उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। परिजनों और अधिवक्ताओं का आरोप है कि अस्पताल में समय पर अपेक्षित चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल सकीं। हालत गंभीर होने पर उन्हें दमोह रेफर किया गया, लेकिन एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण निजी वाहन से ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
इसी दिन ग्राम कुड़ाजनी निवासी गर्भवती महिला कविता यादव को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल लाया गया था। प्राथमिक जांच के बाद चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल दमोह रेफर कर दिया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि अस्पताल से एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद उन्हें निजी वाहन की व्यवस्था कर दमोह ले जाना पड़ा। एक ही दिन में सामने आई इन घटनाओं ने स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बृजेश बिल्थरे ने मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि अधिवक्ता सुखदेव प्रजापति को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा और एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती, तो संभवतः उनकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है।
