नई दिल्ली | भारतीय शेयर बाजार के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ पर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने बहुप्रतीक्षित IPO के लिए सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर (DRHP) जमा कर दिए हैं। लगभग 30,000 करोड़ रुपये के आकार वाला यह आईपीओ हुंडई मोटर इंडिया के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए देश का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बनने जा रहा है। यह पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) होगा, जिसमें कंपनी नए शेयर जारी नहीं करेगी।
निवेशकों की हिस्सेदारी और प्रमुख शेयरधारक
इस आईपीओ के जरिए 23 मौजूदा शेयरधारक अपनी 6 फीसदी हिस्सेदारी बेचेंगे। इसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सबसे बड़ी विक्रेता होगी, जो करीब 2.48 करोड़ शेयर बेचेगी। अन्य बड़े निवेशकों में कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं। हालांकि, एनएसई की सबसे बड़ी शेयरधारक भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखेगी और कोई भी शेयर नहीं बेचेगी।
10 साल का लंबा इंतजार और वित्तीय स्थिति
एनएसई की लिस्टिंग का सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। 2016 में पहली बार आवेदन के बाद, ‘को-लोकेशन विवाद’ के कारण यह योजना करीब एक दशक तक अटकी रही। आखिरकार, 1,388 करोड़ रुपये के निपटान शुल्क के भुगतान के साथ सेबी से मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हुआ। वित्तीय आंकड़ों की बात करें तो मार्च 2026 तिमाही में एनएसई का शुद्ध मुनाफा 8 फीसदी बढ़कर 2,871 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।

