नई दिल्ली | हाल ही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई वेदांता पावर अब अपने कारोबार के विस्तार के लिए नई संभावनाओं को तलाश रही है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह अपनी दीर्घकालिक विविधीकरण योजना के तहत पनबिजली, बैटरी भंडारण और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में प्रवेश करने की तैयारी कर रही है। वेदांता समूह का मानना है कि ये स्वच्छ ऊर्जा स्रोत भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और देश के ऊर्जा बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कोयले के साथ स्वच्छ ऊर्जा का तालमेल
वर्तमान में ताप-विद्युत क्षमता पर केंद्रित वेदांता पावर ने स्पष्ट किया है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों में कोयले की भूमिका बनी रहेगी, लेकिन इसे नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के साथ संतुलित किया जाएगा। कंपनी परमाणु ऊर्जा को एक विश्वसनीय और 24 घंटे उपलब्ध बिजली स्रोत के रूप में देख रही है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य भविष्य की मांग को पूरा करते हुए कंपनी को एक मजबूत और केंद्रित स्वतंत्र इकाई के रूप में स्थापित करना है।
विस्तार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
वेदांता पावर ने अपनी उत्पादन क्षमता को 20 गीगावॉट तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, ताकि वह देश की शीर्ष तीन निजी बिजली कंपनियों में शामिल हो सके। इस योजना के तहत, चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में सक्ती संयंत्र में 600 मेगावाट की दूसरी इकाई शुरू की जाएगी। कंपनी का लक्ष्य 2032-33 तक कुल क्षमता को 12 गीगावाट तक पहुँचाना है, जिसके लिए मौजूदा संयंत्रों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

