पवन कल्याण के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट पर बेंगलुरु कोर्ट की रोक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को झूठी खबरें और वीडियो तुरंत हटाने के सख्त निर्देश

बेंगलुरु | बेंगलुरु की 16वीं सिटी सिविल कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री कोनिडेला पवन कल्याण के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रहे दुष्प्रचार पर बुधवार को रोक लगा दी है। कोर्ट ने गूगल, मेटा और एक्स (ट्विटर) को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई तक उपमुख्यमंत्री के खिलाफ कोई भी मानहानिकारक सामग्री, वीडियो या बयान प्रसारित न करें। साथ ही, सोशल मीडिया पर पहले से मौजूद आपत्तिजनक सामग्री को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक करने के आदेश दिए गए हैं।

दुष्प्रचार और आरोपों पर कार्रवाई

यह आदेश पवन कल्याण के जीपीए होल्डर राम प्रसाद तल्लुरी द्वारा दायर याचिका पर आया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 29 मई से 1 जून के बीच यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर एक सुनियोजित प्रोपेगैंडा चलाया गया। इसमें उपमुख्यमंत्री पर रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और गंभीर आपराधिक साजिश जैसे झूठे और आधारहीन आरोप लगाए गए, जिसका उद्देश्य उनकी छवि को धूमिल करना और सार्वजनिक सम्मान को ठेस पहुँचाना था।

प्रतिष्ठा की रक्षा का मामला

सुनवाई के दौरान आवेदक के वकील ने तर्क दिया कि पवन कल्याण तीन दशकों से अधिक समय से फिल्म उद्योग का एक बड़ा नाम हैं और वर्तमान में आंध्र प्रदेश में महत्वपूर्ण सरकारी विभाग संभाल रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ फैल रही झूठी खबरों से न केवल उनके व्यक्तित्व को अपूरणीय क्षति हो रही है, बल्कि उनके करोड़ों प्रशंसकों की भावनाओं को भी ठेस पहुँच रही है। कोर्ट ने इस संवेदनशीलता को देखते हुए राहत प्रदान की है।

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