
ग्वालियर। मंगलवार रात चांद दिखने के साथ ही मुस्लिम समाज में त्याग और शहादत के प्रतीक मोहर्रम माह का आगाज बुधवार से हो गया। इसी के साथ इस्लामिक कैलेंडर के नए साल हिजरी सन 1448 की भी शुरुआत हो गई है। शहरकाजी अब्दुल अजीज कादरी की अध्यक्षता में मोती मस्जिद में हुई रुअते हिलाल कमेटी की बैठक के बाद चांद की आधिकारिक घोषणा की गई। उन्होंने बताया कि मोहर्रम की दसवीं तारीख यानी ‘यौमे आशुरा’ 26 जून को होगी, जिस दिन शहर में परंपरागत ताजियों का जुलूस निकाला जाएगा।
मोहर्रम के शुरुआती 10 दिन मुस्लिम समाज के लिए बेहद गमगीन और भावनात्मक होते हैं। इस दौरान हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की करबला में हुई शहादत को याद किया जाता है। शोक के चलते इन 10 दिनों में समाज में शादी-ब्याह या अन्य कोई भी खुशी के उत्सव आयोजित नहीं किए जाएंगे। शहर के इमामबाड़ों और मोहल्लों में मजलिसों व मातमी जत्थों का सिलसिला शुरू हो गया है।
*मोती मस्जिद में रोज होंगे बयान, 23 से लंगर*
धार्मिक कार्यक्रमों के तहत मोती मस्जिद में ईशा की नमाज के बाद प्रतिदिन करबला के इतिहास और हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी पर विशेष बयान होंगे। इसके अलावा:
23, 24 और 25 जून: जरूरतमंदों और अकीदतमंदों के लिए ‘लंगरे हुसैन’ (भोजन वितरण) का आयोजन किया जाएगा। 26 जून (यौमे आशुरा) विशेष दुआ का आयोजन होगा, जिसमें करबला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश कर देश में अमन, चैन और भाईचारे की दुआ मांगी जाएगी।
