इंदौर: शहर में नदी पुनर्जीवित और संरक्षण के लेकर करोड़ों खर्च हो रहे है, लेकिन नदी कैचमेंट एरिया में पक्के निर्माण में सरकारी विभाग भी पीछे नहीं है. शहर में कान्ह सरस्वती नदी को सरकारी विभागों ने भी नहीं छोड़ा है. सरकारी विभागों ने शहर के मध्य क्षेत्र से लेकर नदी उदगम स्थल पर बहुमंजिला इमारत और नदी में सड़क का निर्माण तक कर दिया है. निर्माण नाला बताकर ही किया होगा.
शहर में कान्ह सरस्वती नदी कैचमेंट एरिया में सरकारी विभागों द्वारा पक्के निर्माण कर एनजीटी के आदेश और नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है. इसमें नदी क्षेत्र में इस कदर पक्के निर्माण किए गए है कि नदी किनारे भी गायब हो चुके है. सबसे पहले नगर निगम, जिसने कृष्णपुरा छत्री के पास ही नई सब्जी मंडी, अंडर ग्राउंड पार्किंग का पक्का निर्माण किया. उक्त निर्माण स्मार्ट सिटी के तहत नदी कैचमेंट एरिया के 33 मीटर के क्षेत्र में पूरी तरह से कवर किया गया है, जबकि स्मार्ट सिटी योजना बंद कर दी गई है. इंदौर विकास प्राधिकरण ने बद्रीबाग में बहुमंजिला इमारत बना दी गई है, जो नदी उद्गम स्थल पर ही है.
इसी तरह बिजलपुर में आवास सिटी में नदी के बहाव पर सीमेंट कांक्रीट की पक्की सड़क बना दी गई और मंदिर निर्माण भी हो चुका है. बताया जाता है कि तत्कालीन कलेक्टर ने मंदिर निर्माण रुकवा दिया था, बल्कि हटाने के आदेश दिए थे, लेकिन उल्टा मंदिर में ज्यादा जमीन कवर कर ली गई. बहाव क्षेत्र में सड़क निर्माण भी कर दिया गया है. अब सवाल उठता है कि जब नदी क्षेत्र में सरकारी विभाग ही निर्माण करने से नहीं चूक रहे हैं, तो करोड़ों रुपए किस नदी पुनर्जीवित और संरक्षण के लिए खर्च किए जा रहे है?
निगम ने खुद पैदा किया जल जमाव क्षेत्र
नगर निगम ने शहर में नदी कैचमेंट एरिया में मुख्यालय गेट के सामने मटन मार्केट, हरसिद्धि के पास सड़क और दुकानें, जवाहर मार्ग ब्रिज से चंद्रभागा तक नई सड़क बनाई है. यह सभी निर्माण नदी कैचमेंट एरिया में बनी होने से शहर में जलजमाव के लिए तकनीकी रूप में जिम्मेदार है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट…
कान्ह सरस्वती नदी की लड़ाई लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने कहा कि नदी के कैचमेंट एरिया में रिटर्निंग और गैबेडिन वॉल बना रहे हैं, तो नदी का चरित्र ही समाप्त कर दिया है. नदी पुनर्जीवित हो ही नहीं सकती है. निगम, आईडीए और अन्य कैचमेंट एरिया में लगातार सीमेंट कांक्रीट का पक्का निर्माण कर रहे है, जो नदी पुनर्जीवित और संरक्षण के लिए सबसे बड़ा खतरा है
यह बता रहे हैं जिम्मेदार
स्मार्ट सिटी सीईओ अर्थ जैन ने बताया कि मेरे समय एसी कोई योजना नहीं बनी है. पुराने प्रोजेक्ट में ऐसा कार्य हुआ है. शहर में यदि आपके बताए स्थलों के कारण जल भराव होता है, तो उसको ठीक करेंगे
