तेहरान, 14 जून (वार्ता) अमेरिका के साथ संभावित समझौते को लेकर जारी बातचीत के बीच ईरान के मशहद में विदेश मंत्रालय के दफ्तर के बाहर दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने इकट्ठा होकर विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘फ़ार्स’ द्वारा जारी किए गए वीडियो में काली चादर से खुद को ढक कर कई महिलाएं मंत्रालय की इमारत के बाहर श्री अराघची के खिलाफ नारे लगाती और लाल तथा काले रंग के झंडे लहराती नजर आईं। प्रदर्शनकारी ‘देशद्रोही अराघची मुर्दाबाद’ और ‘घुसपैठिया अराघची मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे। यह विरोध-प्रदर्शन शनिवार को उस समय हुआ, जब अमेरिका के साथ पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में होने वाले इस संभावित शांति समझौते को लेकर ईरान के कट्टरपंथी गुटों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। विरोध कर रहे आलोचकों का तर्क है कि यह समझौता ईरान की रणनीतिक स्थिति के लिए नुकसानदेह साबित होगा। इससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दबदबा और नियंत्रण कमजोर हो जाएगा।इसके साथ ही कुछ कट्टरपंथियों ने ईरानी राजनयिकों और बातचीत करने वाली टीम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बातचीत के दौरान अमेरिका और इजराइल के पक्ष में बहुत ज्यादा और गैर-जरूरी छूट दी गई है, जो कि पूरी तरह से आत्मसमर्पण करने जैसा है।
यह प्रदर्शन श्री अराघची के सरकारी मीडिया पर दिए गए एक टीवी साक्षात्कार के ठीक एक दिन बाद हुआ है। इस साक्षात्कार में श्री अराघची ने कहा था कि विचाराधीन समझौते के तहत ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को हटा दिया जाएगा। इसके बदले में ईरान भी इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से अपनी नाकेबंदी हटा लेगा, हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया कि समुद्री व्यापार जल्द ही युद्ध-पूर्व के स्तर पर पहुंच जाएगा।
श्री अराघची ने इस जलमार्ग को ईरान का एक प्रमुख सुरक्षा कवच बताते हुए कहा था, “होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रबंधन अब पहले जैसा नहीं रहेगा।”दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि युद्ध को समाप्त करने वाले इस समझौते पर रविवार को ही हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। ईरानी अधिकारियों ने हालांकि इस मामले पर बेहद सतर्क रुख अपनाया है। उनका कहना है कि बातचीत अभी भी जारी है और फिलहाल किसी भी अंतिम समझौते को मंजूरी नहीं दी गई है और न ही रविवार को इस पर कोई मुहर लगने वाली है। ईरान का कहना है कि उसने अमेरिका के साथ इस संभावित समझौते पर अभी तक कोई आखिरी फैसला नहीं लिया है और इसके सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक पहलुओं की अभी भी बारीकी से समीक्षा की जा रही है।

