प्री-मानसून: राहत की बारिश के बाद बढ़ी उमस भरी गर्मी

रीवा: जिले में दो दिन पूर्व राहत की बारिश हुई थी और उसके बाद उमस भरी गर्मी बढ़ गई है. प्री-मानसून की गतिविधियां बढ़ गई है साथ ही बादलो की लुका छिपी जारी है. बारिश के बाद रात के न्यूनतम तापमान में गिरावट आई थी. लेकिन दूसरे दिन से तापमान बढ़ गया. पिछले तीन दिन से तापमान 40 डिग्री के नीचे चल रहा है, शनिवार को अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री रहा.

मौसम विभाग की माने तो अगले दो-तीन दिनो में तापमान में कोई खास परिवर्तन नही होगा. लेकिन तेज आंधी के साथ बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है. गौरतलब है कि जिले में प्री-मानसून की गतिविधियां तेज हो गई है. वैसे तो 15 जून से मानसून दस्तक दे देता है अगर सब कुछ ठीक रहा तो समय पर मानसून आ जाएगा. लेकिन जिस तरह से दो दिन पूर्व झमाझम बारिश हुई है उससे खेतो में किसानो ने बोनी को लेकर तैयारी शुरू कर दी है. शनिवार को तेज धूप दिन भर रही लेकिन शाम को हल्के बादल आ गये. जिले के कुछ हिस्सो में हल्की बूंदाबांदी भी हुई है.

बारिश होने के बाद लू और धूप से राहत तो मिली है लेकिन उसम भरी गर्मी बढ़ गई है. बताया गया है कि पूर्वी मध्य प्रदेश में वातावरण में नमी बढ़ रही है जिसके चलते आने वाले दिनो में बादलो की सक्रियता और बढ़ जाएगी तथा प्री-मानसून गतिविधियों में तेजी आने के संकेत है. पिछले कई दिनो से तापमान 40 डिग्री के नीचे बना हुआ है, हालाकि जिस तरह से मौसम है उससे नही लगता कि तापमान और तेज होगा. केवल उमस रहेगी.
खाद बीज को लेकर शुरू हुई मारामारी
खरीफ की बोनी अभी शुरू नही हुई है लेकिन खाद बीज को लेकर मारामारी शुरू हो चुकी है. खेतो में जहा बोनी की तैयारी में किसान जुट गये है वही समितियों में खाद-बीज का टोटा बना हुआ है. डबल लाक केन्द्र से खाद का वितरण हो रहा है जबकि समितियों के पास खाद नही है. पूर्व मे जिस प्रकार से खाद को लेकर किसानों को परेशानी झेलनी पड़ी थी और लाठी खानी पड़ी थी वह किसानो को याद है. लिहाजा लाठी और भीड़ से बचने के लिये किसानो ने पहले से ही खाद की व्यवस्था में जुट गये है. लिहाजा डबल लाक केन्द्रो से किसान खाद ले रहे है. जहा टोकन सिस्टम से खाद का वितरण किया जा रहा है. लेकिन भीड़ ज्यादा होने के कारण खाद वितरण में दिक्कत आ रही है. किसानो का कहना है कि अभी से खाद लेकर रख लें नही तो समय आने पर खाद नही मिलती. पहले से ही खाद स्टोर करने के चक्कर में खाद की कमी केन्द्रो में होने लगी है. जैसे ही मानसून की बारिश शुरू होगी किसानो की बोनी भी होने लगेगी. तब खाद बीज की मारामारी और हो जाएगी. इसी लिये किसान अभी से यूरिया और डीएपी लेकर सुरक्षित रखना चाहते है

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