6 मेडिकल स्टोर्स को नोटिस, 1 का लाइसेंस सीधे निरस्त

6 मेडिकल स्टोर्स को नोटिस, 1 का लाइसेंस सीधे निरस्त

जबलपुर: नशीली दवाओं के अवैध कारोबार को जड़ से उखाडऩे और दवा दुकानों पर मची मनमानी को रोकने के लिए प्रशासन ने कार्रवाई की है। कलेक्टर के निर्देश के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने छापेमारी कर दी जिसके बाद हडक़ंप मच गया है। कार्रवाई के दौरान नशीली दवाओं और एबॉर्शन किट के रिकॉर्ड में भारी हेरफेर भी मिली। ड्रग इंस्पेक्टर ने नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले 6 नामचीन मेडिकल स्टोर्स को कारण बताओ नोटिस थमाया है, जबकि हेराफेरी सामने आने के बाद 1 मेडिकल स्टोर का रिटेल ड्रग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।
इन मेडिकल स्टोर्स पर गिरी गाज
औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी देवेन्द्र कुमार जैन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, तय नियमों और प्रावधानों का खुला उल्लंघन करने पर मैसर्स आर. पी. मेडिकोज, भेड़ाघाटमैसर्स न्यू गंगा मेडिकोज, राइट टाउनसंजीवनी मेडिकल, भेड़ाघाटमैसर्स आयुष ड्रग स्टोर, बिजौरीमोही डिस्ट्रीब्यूटर्स, घमापुर विक्रांत इंटरप्राइजेस, दवा बाजार (सिविक सेंटर)
को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही साफ चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में इनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं मिला, तो इन सभी दुकानों के भी लाइसेंस हमेशा के लिए सस्पेंड या कैंसिल कर दिए जाएंगे।
गड़बड़झाले के साथ बिना फार्मासिस्ट बिक रही थीं दवाएं-
गढ़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत गंगा नगर पंडा की मढिय़ा के पास स्थित मैसर्स न्यू गुरुकृपा मेडिकल दुकान क्रं. 3187/4 पर जब ड्रग इंस्पेक्टर की टीम ने अचानक छापा मारा, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। दुकान से रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट गायब थे और गैर-जिम्मेदाराना तरीके से दवाएं बेची जा रही थीं। मेडिकल संचालक टीम को कोई भी ठोस दलील या स्पष्टीकरण नहीं दे पाया। इसके बाद औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमावली 1945 के नियम 66(1) के तहत उक्त दुकान का फुटकर औषधि विक्रय लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दुकान को बंद करा दिया गया है। जांच में पाया गया कि नियमों को ताक पर रखकर बिना योग्य फार्मासिस्ट के धड़ल्ले से पर्चे वाली दवाएं बांटी जा रही थीं। युवाओं को नशे की गर्त में धकेलने वाली नारकोटिक्स दवाओं और प्रतिबंधित गर्भपात किट के स्टॉक और बिक्री रजिस्टर गायब मिले। मरीजों की जिंदगी दांव पर लगाते हुए, एक्सपायर हो चुकी दवाओं को नष्ट करने के बजाय बिक्री वाले मुख्य स्टॉक के साथ ही छिपाकर रखा गया था। दुकानों में न तो क्रय-विक्रय का सही रिकॉर्ड मिला और न ही जांच टीम के लिए जरूरी निरीक्षण पुस्तिका (फॉर्म 35) उपलब्ध थी।

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