नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य में ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB PMJAY) को लागू करने के लिए कमर कस ली है। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, बंगाल अब तक देश का एकमात्र ऐसा राज्य था जो इस महत्वाकांक्षी योजना से बाहर था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने विजय संबोधन में स्पष्ट किया था कि राज्य में नई सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत को मंजूरी दी जाएगी। इस कदम से बंगाल के लाखों गरीब परिवारों को देश के किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल सकेगा।
अब तक पश्चिम बंगाल सरकार अपनी खुद की ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना संचालित कर रही थी, जो पूर्णतः राज्य द्वारा वित्तपोषित थी। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आयुष्मान भारत के आने से बंगाल के मरीजों को ‘पोर्टेबिलिटी’ की सुविधा मिलेगी, जिससे वे राज्य के बाहर भी बड़े अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे। आयुष्मान भारत में केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में फंडिंग होती है, जबकि स्वास्थ्य साथी का पूरा खर्च राज्य उठाता था। विशेषज्ञों के अनुसार, अब राज्य सरकार के पास इन दोनों योजनाओं को मिलाकर एक ‘हाइब्रिड मॉडल’ तैयार करने का भी विकल्प होगा, जिससे कवरेज का दायरा और अधिक व्यापक हो सकता है।
इस योजना के लागू होने से विशेष रूप से 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और प्रवासी श्रमिकों को बड़ा लाभ मिलेगा, क्योंकि केंद्र सरकार ने हाल ही में आय सीमा हटाकर सभी बुजुर्गों को इस योजना के दायरे में शामिल किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने लाभार्थी डेटाबेस और अस्पताल नेटवर्क को संरेखित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि नई सरकार के गठन के तुरंत बाद इसे धरातल पर उतारा जा सके। इससे न केवल राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में केंद्रीय फंडिंग बढ़ेगी, बल्कि देशभर के बड़े निजी अस्पतालों तक बंगाल के नागरिकों की पहुंच भी आसान हो जाएगी।

