जबलपुर: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तर्ज पर कल्चरल स्ट्रीट जबलपुर शहर में भी बनाई गई थी। इसका उद्देश्य शहर के कलाकारों के लिए बेहतर प्लेटफार्म प्रदान करना था। यहां रोजाना आयोजन होने थे। वर्षों पहले रानी दुर्गावती संग्रहालय के समीप इस प्रोजेक्ट पर लाखों रुपये खर्च कर दिए गए थे, लेकिन आज यह स्ट्रीट बदहाल हो चुकी है। यहां व्यापारियों की कारे ठसके के साथ दिनभर जमी रहती है। यहां लगे कीमती पत्थर अब टूटना शुरू हो चुके है और जिम्मेदार आज भी अंजान बनकर बैठे है। नेपियर टाउन से पुराने बस स्टैंड मार्ग तक बनाई गई कल्चरल स्ट्रीट पर अवैध रूप से खड़े हो रहे वाहनों के कारण रोजाना कलाकारों और पैदल सैर करने वाले आमजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
नहीं हुआ कोई बड़ा कार्य
बता दे कि पहले भी कुछ पत्थरों को जोडऩे व स्मार्ट लाइट लगाने के अलावा यहां कोई बड़ा काम नही हुआ था इसी सड़कों के किनारे फुटपाथ तो बनाए गए लेकिन इनपर भी अतिक्रमण का बुरा साया मंडराने लगता है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर को अरबन स्वरूप देने जितने भी प्रोजेक्ट शुरू किए गए वे ज्यादातर बिखरते चले जा रहे हैं।
जाम से मुक्ति के लिए बनाया गया था फ्लाईओवर
मालूम हो कि कल्चरल स्ट्रीट के नाम पर शहरवासियों को सपना दिखाया गया था इस प्रोजेक्ट के लिए भंवरताल के समीप एक सड़क को भी खत्म कर दिया गया था लेकिन आज वही स्ट्रीट बदहाली की राह पर चल चुकी है। सिर्फ कल्चरल स्ट्रीट ही नहीं शहर में बने फ्लाईओवर के नीचे भी ट्रक, सवारी ऑटो और निजी कारें बेतरतीब तरीके से खड़ी रहती हैं जिससे आधी सड़क घिर जाती है। पीक ऑवर्स में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि बार-बार जाम लगने लग जाता है। इसके बाद भी यातायात विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि मदन महल से दमोहनाका तक बनाए गए फ्लाईओवर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए बनाया गया था, लेकिन इसके नीचे का हिस्सा ही अब जाम की सबसे बड़ी वजह बन गया है
