अनोखा प्रदर्शन: कलेक्ट्रेट पहुंचीं महिला सुपरवाइजर, डेढ़ महीने की 200 भ्रष्टाचार की खबरें दिखाकर प्रशासन को घेरा

अशोकनगर। जिला मुख्यालय पर महिला एवं बाल विकास विभाग में दो महिला सुपरवाइजरों (पर्यवेक्षकों) के निलंबन और एक को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद विभाग की अन्य पर्यवेक्षक खुलकर विरोध में उतर आई हैं। शुक्रवार को संयुक्त मोर्चा आईसीडीएस परियोजना अधिकारी संघ एवं पर्यवेक्षक संघ मप्र के नेतृत्व में जिले की सुपरवाइजरों ने अनोखे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा और पिछले डेढ़ महीने में जिले के विभिन्न विभागों में फैले भ्रष्टाचार से जुड़ी खबरों की एक अनोखी प्रदर्शनी लगाई।

प्रदर्शन कर रही सुपरवाइजरों ने कहा कि पिछले डेढ महीने में जिले के तमाम विभागों में भ्रष्टाचार की सैकड़ों खबरें प्रमुखता से छपीं, लेकिन आज तक उन पर सिर्फ जांच जारी है का बहाना बनाकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, महिला एवं बाल विकास विभाग में केवल एक समाचार या शिकायत के आधार पर बिना किसी निष्पक्ष जांच और बिना उनका पक्ष सुने सीधे निलंबन जैसी दंडात्मक कार्रवाई कर दी गई।

महिलाओं के साथ भेदभाव और मानसिक शोषण का आरोप:

सौंपे गए ज्ञापन में संघ ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा, क्या इस विभाग में महिलाएं कार्यरत हैं, इसलिए उन्हें आसानी से निशाना बनाया जा रहा है? जिस तरह समाज में कई बार महिलाओं की घर में सुनवाई नहीं होती, क्या उसी तरह सरकारी पदों पर कार्यरत महिलाओं के पक्ष को भी अनदेखा किया जा रहा है? यह शोषण कहां तक उचित है? संघ ने मांग की है कि केवल किसी के कहने या शुरुआती शिकायत मात्र से दोष साबित नहीं हो जाता। जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी न हो जाए, तब तक निलंबित पर्यवेक्षकों को तत्काल बहाल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस भेदभावपूर्ण और एकतरफा कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई गई, तो संगठन आगे उग्र आंदोलन करेगा।

राजस्व से लेकर विभिन्न विभागो के भ्रष्टाचार की खबरो की लगाई प्रदर्शनी:

प्रशासन की एक तरफा कार्यवाहीं के विरोध में पर्यवेक्षको द्वारा किये गये प्रदर्शन के दौरान राजस्व सहित विभिन्न विभागो के भ्रष्टाचार की खबरो की प्रदर्शनी लगाई। जिनमें मुख्य रूप से नवभारत द्वारा प्रकाशित खबर तहसीलदार ने मृत व्यक्ति को अतिक्रमक बताते हुए लगाया एक हजार जुर्माना और कर दिया भूमि से बेदखली का आदेश शामिल रहीं। वहीं सुपरवाइजरों ने 1 मई से 10 जून तक विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित विभिन्न विभागों के भ्रष्टाचार से संबंधित करीब 200 से अधिक खबरों की फोटोकॉपी (प्रदर्शनी) लगाकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

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