डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश बढ़ाने का उद्योग जगत से किया आह्वान

नयी दिल्ली, 11 जून (वार्ता) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उद्योग जगत से भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश और भागीदारी को बड़े पैमाने पर बढ़ाने का आह्वान किया है।

डॉ. सिंह ने गुरुवार को यहां आयोजित 10वें ‘इन-स्पेस इंडस्ट्री कनेक्ट’ कार्यक्रम में कहा कि भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र ने नवाचार और तकनीकी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में नेतृत्व हासिल करने के लिए स्थापित उद्योगों की मजबूत भागीदारी, निवेश, विनिर्माण क्षमता और बाजार पहुंच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में निजी क्षेत्र के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र को खोलना भारत के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास में एक ऐतिहासिक निर्णय था। इस सुधार ने देश की उद्यमशील क्षमता को नई ऊर्जा दी और कम समय में भारतीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों के बाद लागू की गई भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 ने निवेशकों और उद्योगों को स्पष्ट दिशा और नियामकीय स्पष्टता प्रदान की है। वहीं प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में उदारीकरण से निवेश आकर्षित करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नवाचार और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड तथा 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड शुरू किया है। इसके अलावा सीड फंडिंग, इन्क्यूबेशन सहायता, कौशल विकास कार्यक्रम और एआईसीटीई से स्वीकृत स्पेस टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार मानव संसाधन विकसित किए जा रहे हैं।

भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की तेज़ प्रगति का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि कुछ अग्रणी कंपनियों से शुरू हुआ यह क्षेत्र आज 400 से अधिक स्टार्टअप और सैकड़ों बड़ी एवं छोटी कंपनियों के मजबूत नेटवर्क में बदल चुका है। भारतीय कंपनियां अब प्रक्षेपण यान, उपग्रह, प्रणोदन प्रणाली, पृथ्वी अवलोकन तकनीक, अंतरिक्ष निगरानी क्षमताओं और विभिन्न अंतरिक्ष आधारित समाधानों का विकास कर रही हैं।

उन्होंने उद्योग जगत से अंतरिक्ष क्षेत्र में कार्य करते समय आने वाली चुनौतियों और बाधाओं को खुलकर सरकार के समक्ष रखने का आग्रह किया। साथ ही आश्वासन दिया कि सरकार उद्योगों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखते हुए अनुमोदन प्रक्रियाओं को तेज, पारदर्शी और सरल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

 

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