मुंबई, 11 जून (वार्ता) शिवसेना (यूबीटी) के नेता एवं राज्य सभा सदसय संजय राउत ने गुरुवार को एक सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अमेरिका में मुलाकात की थी, जिसके बाद ही श्री दिपके भारत लौटे।
श्री मोदी और श्री दिपके की एक कथित मुलाकात की तस्वीर ट्वीट करते हुए श्री राउत ने कहा, “ किसी ने मुझे यह तस्वीर भेजी है जो श्री मोदी और श्री दिपके के बीच हुई बैठक की बताई जा रही है। मुझे यह भी बताया गया कि श्री दिपके अमेरिका में प्रधानमंत्री से मिलने के बाद ही भारत वापस आये। मैं इस बारे में और अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा हूं।”
श्री राउत ने कहा कि श्री दिपके के इस आंदोलन से कुछ हासिल होने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में विपक्षी दल सरकार के खिलाफ लड़ने में पूरी तरह सक्षम हैं। कांग्रेस ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर देश भर में प्रदर्शन किए, लेकिन मीडिया ने इन विरोध-प्रदर्शनों को नहीं दिखाया।
उन्होंने स्पष्ट किया, “ पहले मैंने सीजेपी के आंदोलन का समर्थन किया था, लेकिन जब कुछ नयी जानकारियां सामने आईं, तो मुझे लगा कि इसे सबके साथ साझा करना जरूरी है। अब तक किसी भी राजनीतिक दल का कोई भी नेता सीजेपी के इस आंदोलन में शामिल नहीं हुआ है।”
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी युवाओं के साथ है और अगर युवा सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज उठा रहे हैं, तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए, लेकिन, अगर कोई पर्दे के पीछे से सरकार की मदद कर रहा है, तो हमारी उस पर पूरी नजर है।
दूसरी तरफ, सीजेपी के संस्थापक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी मांग को दोहराया है। उन्होंने परीक्षा में हुई अनियमितताओं के खिलाफ गुरुवार से सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू) परिसर से एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है।
पुणे में एक संवाददाता सम्मेलन में श्री दिपके ने कहा कि यह अभियान गुरुवार को पुणे के एसपीपीयू परिसर से शुरू होकर जयपुर, लखनऊ, अमृतसर और बेंगलुरु से गुजरते हुए 20 जून को नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर समाप्त होगा। उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में होगा और इसमें जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भी शामिल होने की उम्मीद है।
श्री दिपके ने कड़े तेवर अपनाते हुए कहा, ‘4 हम तब तक वापस नहीं लौटेंगे जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते, जो एक करोड़ से अधिक छात्रों के भविष्य को खतरे में डालने के लिए जिम्मेदार हैं। आंदोलन की शुरुआत के साथ ही हम एक शिक्षा घोषणापत्र भी जारी करेंगे।”
उन्होंने कहा कि इस घोषणापत्र में पेपर लीक रोकने, परीक्षा परिणामों को समय पर घोषित करने, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने, परीक्षा प्राधिकरणों की जवाबदेही तय करने और परीक्षाओं में होने वाली देरी जैसे छात्रों के तमाम बड़े मुद्दों को शामिल किया गया है।
