जबलपुर:मदन महल चौकीताल, लम्हेटा घाट मेन रोड स्थित एक्स रे एवं सोनोग्राफी सेंटर क्लीनिक का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। दरअसल जांच मेंं क्लीनिक में सोनोग्राफी केन्द्र में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन, पंजीयन, योग्य स्टॉफ समेत अन्य भारी गड़बडिय़ां मिलने के साथ हेराफेरी सामने आई थी। जांच के बाद मामले में पंजीयन निरस्त की कार्रवाई की गई।
जानकारी के मुताबिक 31 अक्टूबर को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जबलपुर ने जांच दल के साथ डॉक्टर हिमलेश चरण दुबे द्वारा संचालित मदन महल एक्स रे एवं सोनोग्राफी सेंटर क्लीनिक का निरीक्षण किया था। जिसमें गंभीर अनियमित्ताएं मिली थी। गर्भस्थ शिशु एवं प्रसव पूर्व निदान तकरीक अधिनियम का उल्लंघन पाया गया था। जांच में पाया गया कि क्लीनिक में बायोमेडिकल वेस्ट का पृथक्करण निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं किया जा रहा था।
क्लीनिक में इंजेक्शन एवं अन्य औषधियों का उपयोग किया जा रहा है, किंतु किसी पंजीकृत बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण एजेंसी से अनुबंध नहीं पाया गया। निरीक्षण के दौरान कुछ इंजेक्शन एवं दवाइयों मिलीं जिन्हें सीलबंद किया गया था। इसके अलावा पीसीपीएनडीटी कार्य के संचालन के लिए सरकार द्वारा निर्धारित पीसीपीएनडीटी ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है जिसमें प्रत्येक गर्भवती महिला की सोनोग्राफी किए जाने से पूर्व फोर्म-एफ की प्रविष्टि करना अनिवार्य है।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि किसी भी मरीज के लिए फॉर्म-एफ पोर्टल पर भरा नहीं जा रहा था। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि केंद्र पर आने वाले अधिकांश मरीज जिले जबलपुर के बाहर के क्षेत्रों से थे। स्थानीय लोगों द्वारा बताया गया कि यहां बाहर से आने वाली गाडिय़ों की संख्या अधिक रहती है। निरीक्षण के दिन दो मरीज पाए गए। जिनकी रिपोर्ट में फोटो हेरफेर की आशंका थी।
डॉ. हेगलेश चंद्र दुबे की डिग्री एवं पंजीयन प्रमाणपत्र नियम अनुसार क्लीनिक में प्रदर्शित नहीं किए गए थे। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि पंजीयन प्रमाणपत्र में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें प्रदर्शित की गई थीं, जिनमें से एक बीपीएल कंपनी की मशीन संस्था में उपलब्ध नहीं पाई गई। यह पंजीकरण विवरण में गंभीर असत्यापन को दर्शाता है। क्लीनिक परिसर में लिंग परीक्षण कराना कराना दंडनीय अपराध है संबंधी कोई भी जनजागरूकता बोर्ड या पोस्टर प्रदर्शित नहीं था।
संस्था में विभिन्न सोनोग्राफी जाँचों की नियत दर सूची प्रदर्शित नहीं की गई थी। सामान्य मरीज रजिस्टर एवं गैर-पंजीकृत सोनोग्राफी का अभाव मिला। निरीक्षण के समय क्लीनिक में कोई भी रेडियोलॉजी योग्यताधारी स्टाफ उपस्थित नहीं था। इसके अलावा विद्युत सुरक्षा ऑडिट, रेफरल एवं चिकित्सकीय निर्देशन का अभाव मिला। इसके साथ अन्य गड़बडिय़ां मिली थी।
