ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
ग्वालियर के तीनों प्राधिकरणों में अब नया निजाम है। मेला प्राधिकरण ग्वालियर चंबल डायरी हरीश दुबे।में नरेंद्र सिंह के समर्थक अशोक जादौन, साडा में सिंधिया के करीबी अशोक शर्मा तो जीडीए में सीधे संघ से जुड़े मधुसूदन भदौरिया अध्यक्षी संभाल रहे हैं। चूंकि तीनों प्राधिकरण स्वायत्तशासी हैं, लिहाजा इनके अध्यक्ष भी फ़्रीहैंड हैं। नई नियुक्तियों के बाद इन प्राधिकरणों के कामकाज में फिलहाल तो कोई बाधा नहीं दिखती लेकिन भविष्य की अड़चन इन अध्यक्षों के साथ ही नियुक्त किए गए उपाध्यक्षों के कार्य विभाजन के दौरान आ सकती है।
जीडीए में दो और साडा व मेला प्राधिकरण में एक एक उपाध्यक्ष नियुक्त हुए हैं। ये सभी चार उपाध्यक्ष प्राधिकरण में महत्वपूर्ण कॉलोनियों से लेकर सीधे जनता व व्यापारियों से जुड़ाव वाली रसूखदार जिम्मेदारियां चाहते हैं। चूंकि अध्यक्षों के साथ ही उपाध्यक्ष भी सत्तारूढ़ दल के अलग अलग क्षत्रपों से ताकत हासिल करते हैं, लिहाजा कार्य विभाजन में ज्यादा से ज्यादा वजन हासिल करने की कवायद के लिए दिल्ली भोपाल तक दौड़ चल रही है। इधर, अशोक जादौन दिसंबर से शुरू होने वाले ग्वालियर व्यापार मेला की तैयारी में जुटे हैं तो मधुसूदन इस दीवाली तक शहर को बड़ी आवासीय योजना देना चाहते हैं जबकि अशोक शर्मा के समक्ष चुनौती साडा को हाशिए से उठाकर मुख्य धारा में लाने की है।
मीनाक्षी के साथ खड़ी नजर आई चंबल की पूरी कांग्रेस
मीनाक्षी नटराजन एक दौर में जब एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष, युवक कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष और नेहरू युवा केंद्र की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे बड़े राजनीतिक रसूख वाले ओहदे संभाल रही थीं, तभी से ग्वालियर चंबल अंचल से उनका भावनात्मक लगाव रहा है। उन्होंने यहां के कई नेताओं को अपनी टैलेंट दिखाने के लिए प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध कराकर उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई। यही वजह है कि राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए कांग्रेस ने जब उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित किया तो इस अंचल में खूब जश्न मना और जब उनका नामांकन रद्द हुआ तो उनके गृहक्षेत्र मंदसौर रतलाम के बाद जिस इलाके के कांग्रेसजंन सर्वाधिक गम में डूबे हैं तो वह ग्वालियर चंबल क्षेत्र है। मीनाक्षी का नामांकन रद्द होने के विरोध में आज चंबल अंचल के हरेक शहर में हुए विरोध प्रदर्शनों में जिस तरह जिस तरह कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ी और आक्रोष छलका, उससे जाहिर है कि उन्हें भले ही पार्टी में भीड़ जुटाने वाली नेता न माना जाता रहा हो लेकिन सांगठनिक स्तर पर उनका कोई शानी नहीं है। जब ग्वालियर में एनएसयूआई और युकां में पदाधिकारी ऊपर से थोपने के बजाए पहली बार चुनाव के जरिए चयन की परिपाटी शुरू हुई तो उन्होंने इसकी सीधी मॉनिटरिंग की थी ।
निकाय चुनाव से पहले महिला मोर्चा में पूरे घर के बदले
अंततः करुणा सक्सेना भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्षी पाने में कामयाब रहीं हैं। डॉक्टरेट की डिग्रीधारी करुणा को स्थानीय पार्टी संगठन में सर्वाधिक पढ़ी लिखी महिला नेत्रियों में शुमार किया जाता है। वे अभी तक जिला महामंत्री थीं और अब उन्हें प्रमोशन मिला है। हालांकि एक और जिला महामंत्री किरणलता भदौरिया भी स्पर्धा में थीं। ममता भिलवार का भी नाम भी चल रहा था लेकिन लॉटरी करुणा सक्सैना के नाम की खुली। अभी तक नीलिमा शिन्दे जिलाध्यक्ष पद संभाल रही थीं। पार्टी निवर्तमान पदाधिकारियों नीलिमा और किरणलता को संगठन में अन्य कहीं एडजस्ट कर सकती है। खास बात यह कि नई अध्यक्ष करुणा सक्सेना और पुरानी अध्यक्ष नीलिमा ने अपना राजनीतिक कैरियर ग्वालियर निगम में पार्षदी से शुरू किया था और बाद में महिला मोर्चा में जिला नेतृत्व तक पहुंचीं। सिर्फ ग्वालियर ही नहीं बल्कि अंचल के मुरैना, शिवपुरी, श्योपुर और अशोकनगर में भी महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष बदल दी गई हैं। चूंकि निकाय चुनाव नजदीक हैं और टिकट वितरण में महिला मोर्चा की अनुशंसा भी मायने रखती है, लिहाजा इन नियुक्तियों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मंत्री के साथ मंच साझा कर मुसीबत में पार्षद पति आसिफ अली
कांग्रेस नेता और पार्षदपति आसिफ अली खान को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री के साथ मंच साझा करना महंगा पड़ गया है। जनप्रतिनिधि के नाते ऊर्जा मंत्री के साथ उनके मंच पर बैठने में कांग्रेस अनुशासन समिति को ज्यादा एतराज नहीं है लेकिन इल्जाम यह है कि जब मंत्री महोदय मंच से कांग्रेस पर एक के बाद एक हमले कर रहे थे, तब आसिफ अली चुप्पी लगाकर बैठ गए। इससे पहले भी आसिफ अली कांग्रेस संगठन में पदों के बंटवारे में अल्पसंख्यकों को हाशिए पर रखे जाने का इल्जाम लगाकर किसी तरह बच निकले थे लेकिन इस बार अनुशासन समिति उनके प्रति कुछ ज्यादा ही तल्ख है। उन्हें नोटिस थमा दिया गया है, जिसका जवाब आसिफ ने यह कहते हुए दिया है कि उन्होंने तत्काल ही एक प्रेस रिलीज जारी कर ऊर्जा मंत्री के इल्जामों पर नाराजगी के साथ नाइत्तफाकी जता दी थी। बहरहाल, कांग्रेस में उनके भविष्य को लेकर फैसला अनुशासन समिति ने होल्ड पर रखा है।
