नयी दिल्ली, 10 जून (वार्ता) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को कहा कि किसी भी शासन व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि कानूनों और नीतियों को ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावशीलता के साथ लागू किया जाता है। श्री बिरला ने संसद भवन में 2024 बैच के आईएएस प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वह अपनी सेवा को केवल एक पेशा न मानें, बल्कि संविधान, राष्ट्र और नागरिकों के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि लोक सेवक नागरिकों की आकांक्षाओं को वास्तविक परिणामों में बदलने वाले परिवर्तन के वाहक होते हैं। संसद केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि देश की जनता की आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और चिंताओं की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि संसद के साथ जुड़ाव से प्रशिक्षु अधिकारियों को लोकतांत्रिक शासन, विधायी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को निकट से समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने अधिकारियों से अपने संसदीय अनुभव का उपयोग लोक प्रशासन और लोकतांत्रिक जवाबदेही की बेहतर समझ विकसित करने के लिए करने का आह्वान किया। लोकसभा अध्यक्ष ने विधायी प्रक्रिया को समग्र रूप से समझने पर बल देते हुए कहा कि संसद कानून बनाती है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र उन कानूनों की मंशा को नागरिकों तक पहुंचाने का कार्य करता है। किसी भी कानून का वास्तविक मूल्य उसके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित होता है। उन्होंने कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं को आवाज़ देते हैं, जबकि प्रशासक नीतियों, योजनाओं और बेहतर सेवा वितरण के माध्यम से उन अपेक्षाओं को धरातल पर उतारते हैं।
श्री बिरला ने प्रशिक्षु अधिकारियों को जनता से जुड़े रहने और भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक तथा भौगोलिक विविधताओं को समझने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एक सफल प्रशासक के लिए कानूनों और नियमों का ज्ञान जितना आवश्यक है, उतनी ही महत्वपूर्ण संवेदनशीलता, सहानुभूति और स्थानीय परिस्थितियों की समझ भी है। स्थानीय भाषाओं में संवाद करने और लोगों की समस्याओं को समझने वाले अधिकारी अधिक प्रभावी ढंग से जनविश्वास अर्जित कर सकते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान देश की शासन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बना रहा है।
उन्होंने ईमानदारी, करुणा, जवाबदेही और जनसेवा के प्रति समर्पण को प्रत्येक सिविल सेवक के लिए अनिवार्य गुण बताया। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा के उच्च मानकों को बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा पर देशवासियों का गहरा विश्वास है। अधिकारियों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने और संवैधानिक मूल्यों, जन-जवाबदेही तथा नागरिक-केंद्रित प्रशासन को अपने पूरे सेवा काल में प्राथमिकता देने की सलाह दी।

