वाराणसी, 10 जून (वार्ता) उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी में नगर निगम के फैसले के बाद शहर की सीमा से बाहर मीट-मांस व मछली की दुकानों को लेकर अब राजनीति गरमा गई है। बुधवार को मैदागिन स्थित कांग्रेस के पार्टी कार्यालय में कांग्रेस के पार्षदों ने इस फैसले का विरोध किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षद दल के नेता गुलशन अली द्वारा शनिवार को हुई सदन की बैठक में इस संबंध में कोई लिखित प्रस्ताव नहीं दिया गया था। फिर भी नगर निगम द्वारा यह प्रचारित करवाया गया कि प्रस्ताव गुलशन अली द्वारा लाया गया था, जिस पर सदन में सहमति बनी। पार्षदों ने मांग की कि प्रस्ताव सार्वजनिक किया जाए, यदि कोई लिखित प्रस्ताव दिया गया है तो उसे सामने लाया जाए।
गुलशन अली ने बताया कि बैठक में केवल मौखिक चर्चा हुई थी कि आगे सावन का महीना आ रहा है। ऐसे में अचानक आदेश जारी कर दिया गया कि मीट-मछली की दुकानें बंद रहेंगी। पूरे सावन महीने में ये कारोबारी क्या करेंगे। उनका परिवार कैसे चलेगा। मीट-मछली व्यवसायी इस महीने में क्या करेंगे और कहाँ जाएंगे। यह बात मौखिक रूप से कही गई थी। गुलशन अली ने कहा कि उनके नाम से खबरें नगर निगम द्वारा प्रचारित करवा दी गईं, जो सरासर गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि बकरीद से पहले बकरा मंडी भी बंद करवा दी गई थी।
महानगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि एक साजिश के तहत कांग्रेस पार्षद दल के नेता गुलशन अली का नाम आगे करके यह प्रचारित किया गया कि उनकी ओर से सदन में प्रस्ताव दिया गया था। इसी के आधार पर निर्णय लिया गया कि काशी में शहर की सीमा से बाहर मीट-मांस व मछली की दुकानें स्थानांतरित की जाएंगी।
राघवेंद्र चौबे ने चेतावनी दी कि एक हफ्ते के अंदर नगर निगम उस लिखित प्रस्ताव को सार्वजनिक करे, अन्यथा कांग्रेस पार्टी विधिक कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि किसी के मान-सम्मान और प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए यह सब किया गया है।
