
भोपाल। वार्ड की सफाई 6 कर्मचारियों से भी कराई जा सकती है, यह बात महापौर ने परिषद की बैठक में कही. आगे उन्होंने कहा कि रात्रिकालीन सफाई कहां होती है यह जानकारी फील्ड में जाने वाले पार्षदों को पता होता है. जो वॉट्सएप पर नहीं मिलेगी. अधिकतर पार्षदों को सफाई से जुड़ी सभी जानकारी पता है. उन्हें कर्मचारी कम है या ज्यादा होने से फर्क नहीं पड़ता है. यह बात माहपौर ने पार्षद पप्पू विलास और राजेन्द्र चौकसे के द्वारा वार्डों में सफाई कर्मचारियों की कमी से सफाई व्यवस्था नहीं होने वाली बात पर कही थी. नगर निगम परिषद की बैठक मंगलवार को आयोजित की गई. यह बैठक आईएसबीटी स्थिति पुराने निगम कार्यालय के सभागार में हुई. इसका शुभारंभ वंदेमातरम गान के साथ किया गया. हालांकि यह बैठक 11 बजे से होना चाहिए थी जो 11: 45 पर हुई. परिषद की शुरुआत अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने प्रमुख एजेंडा अपशिष्ठ पर चर्चा से शुरू की.
अपशिष्ट को दो की जगह चार विभागों में किया विभाजित
परिषद में नगरीय प्रशाासन से आए अपशिष्ट प्रबंधन के जानकार अतुल खरे बताया कि खुले में कचरा फेंका या जलाया गया तो निगम इस पर सख्ती कर जुर्माने की कार्रवाई करना होगी. खरे ने आगे बताया कि केन्द्र के द्वारा अपशिष्ट को चार भागों विभाजित किया गया है, जिसमें सूखी, गीला, ई वेस्ट, मेडिकल वेस्ट. अब निगम की कचरा वाहनों में चार तरह के पाटिशन होंगे, वहीं दुकान और होटल, मॉल संचालकों चार तरह के वेस्ट के लिए अलग अलग डब्बे रखने होंगे. इस वहीं 20 हजार वर्गफिट या 40 हजार लीटर पानी का उपयोग होता है तो उनको भी बल्क में कचरा उठाने की परमीशन निगम से लेना होगी. अगर इन नियमों का पालन नहीं किया गया निगम नियमानुसार जुर्माने या अन्य उचित हो वह कार्रवाई की जाएगी. वहीं बिना निगम की अनुमति से यदि 100 लोगों का कार्यक्रम किया जा रहा है तो निगम को 3 दिन पहले सूचना देना होगी.
शहर में पोलिथिन पर रोक लगाने ठोस कदम उठाए जाएं: मो. सरवर
निगम परिषद की नेता प्रतिपक्ष शहर से बाहर होने के कारण उनकी भूमिका निभाई. के लिए अध्यक्ष ने मो. सरवर को अनुमति दी. अपशिष्ट प्रबंधन पर चर्चा करते हुए मो. सरवर ने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक, पॉलिथीन की फैक्ट्रियों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. बेचने वालों पर कार्रवाई करना गलत है. पॉलीथिन पर ठोस कार्रवाई नहीं होती. सख्ती करेंगे तो ही ये नियम लागू होंगे. उन्होंने कागजों के थैले के इस्तेमाल पर जोर दिया. साथ ही खुले में फेंके जाने वाले डायपर व सेनिटरी पेड पर भी नाराजगी जताई. सूखा-गीला कचरा अलग-अलग उठाया जाता है. यदि नाली साफ की जाती है तो कचरा बाहर ही रख दिया जाता है, कचरा वाहन वाले इसे उठाते नहीं है. ङ्क्षजस वजह से कचरा सूखने के बाद इधर-उधर फेलता है. इस तरह से सफाई में काफी कमियां हैं. जिन्हेें दूर करने की बात नहीं हो रही. पहले ही हम जनता से स्वच्छता शुल्क वसूल रहे हैं. अब नए नियम लागू होने से जनता पर बोझ पड़ेगा.
सफाई कर्मियों की कमी
पार्षद पप्पू विलास ने कहा कि मेरे वार्ड में 20 साल पहले लगभग 58 सफाई कर्मचारी थे, उसके बाद से क्षेत्रफल भी बढ़ा है और हर साल कर्मचारी सेवानिवृत हो रहे हैं. वहीं कुछ का आकश्मिक निधन भी हो चुका है. जिससे कर्मचारियों की कमी है. एैसे में कम कर्मचारियों से सफाई नहीं हो पा रही है. सफाई कर्मचारियों की भर्ती नहीं की जा रही है.
चार साल से कचरा गाड़ी नहीं
पार्षद राजेंद्र चौकसे ने कहा कि ट्रांसपोर्ट नगर समेत मेरे वार्ड की कई सरकारी मल्टियों में सफाई व्यवस्था बेहतर नहीं है. कर्मचारियों की कमी की वजह से मुझे वार्ड में स्वयं जाकर सफाई करवाता हूं. लेकिन मेरे यहां चार साल से कचरा गाड़ी नहीं है. वहीं पॉलीथिन में ही कचरा फेंका जाता है.
5 दिन तक कचरा नहीं उठाया जाता
कांग्रेस पार्षद गुड्डू चौहान ने कहा कि परिषद में नए नियम की बात हो रही है, निगम के पास संसाधन और पैसों की कमी है. सिर्फ बोलने से काम नहीं चलेगा. स्थिति यह है कि अगर वार्ड की कचरा गाड़ी यदि खराब हो जाए तो उस वार्ड का कचरा 5 दिन तक नहीं उठाया जाता है. हर वार्ड में कर्मचारियों की कमी है. सफाई कर्मचारियों की कमी को दूर करने भर्ती की जाना चाहिए.
