
भोपाल। मध्यप्रदेश के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार वार्ता कर आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रत्याशी ने नामांकन पत्र में एक आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाई, जिसके चलते उनका नामांकन निरस्त हुआ।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भाजपा के तीनों राज्यसभा प्रत्याशियों के नामांकन पत्र वैध पाए गए हैं, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निर्वाचन अधिकारी ने जांच और सुनवाई के बाद निरस्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने जानबूझकर आपराधिक मामले की जानकारी छिपाकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि चुनावी शपथपत्र में सभी आपराधिक मामलों का उल्लेख करना अनिवार्य होता है और ऐसी जानकारी छिपाना मतदाताओं के साथ धोखा है।
डॉ. यादव ने कहा कि कांग्रेस हार के डर से नए-नए हथकंडे अपना रही है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से जनता से माफी मांगने और नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि इस तथ्य को समय रहते उजागर नहीं किया जाता तो चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने भी कांग्रेस पर मतदाताओं को भ्रमित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संबंधित मामले में न्यायालय का समन जारी हो चुका था और कांग्रेस प्रत्याशी को प्रकरण की जानकारी होने के बावजूद इसे नामांकन पत्र में दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन अधिकारी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद निर्णय लिया है।
खण्डेलवाल ने कहा कि नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना गंभीर विषय है और कानून में इसके लिए दंड का प्रावधान भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने तथ्य छिपाकर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया, लेकिन भाजपा द्वारा उठाई गई आपत्ति के बाद पूरा मामला सामने आया।
पत्रकार वार्ता में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राकेश सिंह, मंत्री गौतम टेटवाल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद विष्णुदत्त शर्मा, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रोहित आर्य, राज्यसभा प्रत्याशी रजनीश अग्रवाल, महेश केवट सहित भाजपा के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
