वैश्विक निर्माण वृद्धि में योगदान के मामले में भारत दूसरे नंबर पर: रिपोर्ट

मुंबई/बर्लिन, 09 जून (वार्ता) बुनियादी ढांचों के निर्माण पर ज्यादा ध्यान देने के कारण वैश्विक निर्माण वृद्धि में मौजूदा दशक में योगदान के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। वास्तुकला, इंजीनियरिंग और निर्माण प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता रखने वाली बर्लिन स्थित वेंचर कैपिटल फर्म फाउंडामेंटल की ‘स्टेट ऑफ द प्रोजेक्ट इकोनॉमी 2026’ रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2030 के बीच वैश्विक निर्माण वृद्धि में योगदान देने वाले देशों में चीन के बाद भारत का दूसरा स्थान है। इस मामले में उसने अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। भारत और चीन ने मिलकर इस अवधि के दौरान वैश्विक निर्माण वृद्धि में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक पूंजीगत व्यय तेजी से पांच देशों — भारत, चीन, अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस — में केंद्रित होता जा रहा है।

फाउंडामेंटल के सह-संस्थापक एवं जनरल पार्टनर शुभांकर भट्टाचार्य ने कहा, “साल 2020 से 2030 के बीच निर्माण की मात्रा के आधार पर वैश्विक निर्माण वृद्धि में भारत की हिस्सेदारी 14.1 प्रतिशत है। यह केवल चीन (26.1 प्रतिशत) से कम है और अमेरिका (11.1 प्रतिशत) से अधिक है।” रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2024 में वैश्विक निर्माण व्यय 15.97 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गया और साल 2028 तक इसके 19.86 लाख करोड़ डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है। यह 5.6 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) को दर्शाता है। इससे निर्माण क्षेत्र वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक बन गया है।

इस कुल व्यय में, अवसंरचना विश्व स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रमुख निर्माण खंड है, जो 2020 से 2025 के बीच 5.1 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़ रहा है। भारत में यह गति और भी अधिक है; देश का अवसंरचना बाजार दशक के अंत तक लगभग आठ प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ने का अनुमान है, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि 1960 के बाद से वैश्विक सकल स्थिर पूंजी निर्माण लगभग 30 गुना बढ़ चुका है और यह निवेश अब कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अधिक केंद्रित होता जा रहा है। श्री भट्टाचार्य ने कहा कि वैश्विक निर्माण व्यय पहले के अनुमानों को पार कर चुका है और अवसंरचना, औद्योगिक सुविधाओं, ऊर्जा प्रणालियों, परिवहन नेटवर्क तथा डिजिटल अवसंरचना में नये अवसर पैदा कर रहा है।

फाउंडामेंटल के अनुसार, वैश्विक पूंजीगत व्यय में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी उसकी अवसंरचना नीति, तीव्र शहरीकरण, विनिर्माण-आधारित विकास तथा लॉजिस्टिक्स, परिवहन और ऊर्जा नेटवर्क में बढ़ते निवेश का परिणाम है। इसमें राजमार्ग, रेलवे, हवाई अड्डे, बंदरगाह, औद्योगिक गलियारे, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना शामिल हैं। कंपनी का मानना है कि भारत का विस्तार अब नियमित व्यावसायिक गतिविधियों के बजाय अवसंरचना, ऊर्जा, रियल एस्टेट और विनिर्माण क्षेत्रों में समयबद्ध और विशिष्ट परियोजनाओं द्वारा संचालित हो रहा है, जो एक परिपक्व “परियोजना अर्थव्यवस्था” की पहचान है।

रिपोर्ट का अनुमान है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्लाउड कंप्यूटिंग के कारण साल 2030 तक वैश्विक डेटा सेंटर निर्माण बाजार 2018 की तुलना में दोगुना हो जायेगा, जिससे यह निर्माण उद्योग के सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल होगा। श्री भट्टाचार्य का कहना है कि साल 2030 तक डेटा सेंटर निर्माण वैश्विक निर्माण बाजार में 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक का अतिरिक्त योगदान दे सकता है। भारत के संदर्भ में रिपोर्ट में कहा गया है कि कि एआई अपनाने, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, क्लाउड विस्तार, वित्तीय सेवाओं के डिजिटलीकरण और डेटा स्थानीयकरण की आवश्यकताओं के कारण डेटा सेंटर निवेश और तेज होगा, जिससे निर्माण, इंजीनियरिंग और परियोजना प्रबंधन क्षेत्रों में मांग बढ़ेगी। डेटा सेंटरों की वृद्धि बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और ग्रिड आधुनिकीकरण की मांग को काफी बढ़ाती है। फाउंडामेंटल का अनुमान है कि आने वाले दशक में भारत को नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रिड आधुनिकीकरण, ट्रांसमिशन नेटवर्क, बैटरी भंडारण और ग्रीन हाइड्रोजन अवसंरचना में बड़े निवेश की आवश्यकता होगी।

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