
गोविन्द बड़ोने ब्यावरा। धार्मिक मान्यतानुसार किन्नर को अर्धनारीश्वर रूप में माना गया है. वर्तमान दौर में किन्नर समुदाय के कुछ सदस्यों ने विभिन्न अवसरों पर यात्राओं में आशीर्वाद केबदले में हठधर्मिता के साथ नेग मांगने की प्रवृत्ति ने समूचे समाज को सवालों के घेरे मेंं ला खड़ा किया है. ऐसे दौर में एक किन्नर ऐसी भी है जिसने अपने जीवन में तालियां बजाकर नेग मांगने की बजाय कृष्ण भक्ति में अपने को डुबोकर वह कार्य किया है कि समाज उनकी उपलब्धि पर तालियां बजा उनका स्वागत, सम्मान करता है.
बाल्यावस्था से कृष्ण की दीवानी बनी एक किन्नर ने आध्यात्म की ऐसी अलख जगाई कि किन्नर होना समाज में अभिषाप माना जाता है उसे उन्होंने वरदान में बदलकर समाज के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया.
उत्तराखण्ड से आई हेमलता सखी शरण जी भारत की दूसरी ऐसी किन्नर कथा वाचक बन गई है जिसने 500 से अधिक कथाओं के माध्यम से भगवान कृष्ण, राम, मीरा की महिमा का गुणगान करके न केवल किन्नर बल्कि सर्व समाज का पथ प्रदर्शित किया है. ब्यावरा में किन्नर समुदाय की राजगढ़ जिले में गुरू मां मीना नायक द्वारा वल्लभा गार्डन परिसर में भागवत कथा के आयोजन में आई हेमलता सखी शरण जी ने नवभारत से चर्चा कर अपने आध्यात्मिक झुकाव के विषय में विस्तार से बताया.
किन्नर से कथाकार बनी हेमलता सखी शरण जी ने नवभारत को बताया कि उनका जन्म जयपुर के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था. उनके पिता सेना में कर्नल थे. मुझे 14 वर्ष की आयु में यह अहसास हुआ कि मैं थर्ड जेंडर हूं तो मैंने परिवार की प्रतिष्ठा समाज में धूमिल न हो इसलिये अचानक अपना आत्मबल मजबूत करते हुए हाईस्कूल के बाद जयपुर से वंृदावन की ओर कूच कर दिया. करीब आठ साल वृंदावन के परिक्रमा मार्ग पर रहने के बाद उन्होंने मथुरा से बीए, एलएलबी की . मथुरा-वृंदावन में रहने के दौरान उनके जीवन में जो परिवर्तन आए वे जीवन का आधार बन गये.कृष्ण भक्ति के प्रति अपने रूझान के संबंध में उन्होंने बताया कि वे वृंदावन में गोविन्द देव जी के मंदिर में बैठकर घंटों तक मीरा के भजन गुनगुनाती रहती थी. मीरा को मैंने अपना गुरू मान लिया. मीरा ने अपने कृष्ण के लिये राजपाठ छोड़ दिया तो मैंरे पास तो कुछ था ही नहीं. बस यही से कृष्ण के प्रति, मीरा के प्रति अनुराग हुआ.
किन्नर जन्म से हो लेकिन विचार और कर्म से नहीं ऐसा क्यों ?
इस प्रश्र का उत्तर देते हुए उन्होने कहा कि मैंरा संकल्प था कि मैं तालिया बजाकर किसी ने नेग नहीं मांगूगी. वृंदावन से उत्तराखण्ड वे काजल मां के साथ पहुंची तो उनको भी मैंने स्पष्ट कहा कि वे तालियां बजाकर लोगो से दान नहीं मांगेगी. उन्होंने संतश्री राजेन्द्र दास जी महाराज से पूछकर भागवत ग्रंथ को पढऩा शुरू किया. उन्होंने नीम करौली में कैंची धाम की गुफा में अपना आसन लगाकर घंटों तक भागवतग्रंथ, रामायण , गीता को पढऩा शुरू किया. उन्होंने अयोध्या में मां सरयू और यमुना नदी में घंटों खड़े रहकर माथे पर रामायण और भागवत ग्रंथ रखकर तपस्या करने का प्रयास किया. इसका असर यह हुआ कि ईश्वर की कृपा से मुझे बोलने का साहस हुआ और वे कथा करने लगी.
अब तक कितनी कथा कर चुकी है ?
इसका जवाब देते हुए वे कहती है कि वे पांच सो से अधिक कथा कर चुकी है. उनका कहना है कि किन्नर समुदाय के मंच से तो केवल उनकी दूसरी ही कथा है. वे तो सर्व समाज के आमंत्रण पर जाती है और ईश्वर का नाम लेती है.
किन्नर समुदाय के प्रति श्रद्धाभाव में कमी का क्या कारण है ?
किन्नर समुदाय को शास्त्रों में महत्व दिया गया है. सभी जानते है कि भगवान राम ने वरदान दिया था कि तुम्हारा आशीर्वाद सदा फलेगा. लेकिन वर्तमान दौर में हमारे समुदाय ने इस वरदान को समझने की भूल की है. अपनी बात बैबाकी से कहते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई आशीर्वाद देने अथवा श्राप देने की सोचता है तो उसके लिये उसे अपनी तपस्या को बढ़ाना होगा. केवल नेग ले लेने, ट्रेनों में बधाई मांग लेने से आशीर्वाद अथवा श्राप देने की ताकत पैदा नहीं होती. इसके लिये तपस्या करनी पड़ती है. यह तपस्या ईश्वर की भक्ति, सतकर्म पर चलने, समाज की सेवा करने से आती है. किन्नर समुदाय को नेग मांगने में जिद करना छोडऩा होगा. रैल में दबावपूर्वक नेग मांगना बंद करना होगा. सर्व समाज हमारा है, उनकी खुशी ही हमारी खुशी है. यह भावना ही सभी का कल्याण कर सकती है.
कथा को लेकर उनके
क्या अनुभव रहे है ?
उनके लिये कथा ईश्वर का गुणगान है. वे कथा को आय का साधन नहीं मानती है. उन्हें यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि कथा आज व्यापार हो गया है और यह भी सत्य है कि धर्म में चिंदि चोर जैसे कथित लोगो की इंट्री हो गई है. मुझे मीरा को गाना, मीरा पर बोलना अच्छा लगता है. वे मीरा पर बोलती है तो करूणा से भर जाती है. उन्हें कृष्ण का प्रेम व्याकुल कर देता है. मंच से कथा करते हुए उनकी अश्रुधारा बह निकलती है. नवभारत से चर्चा करती हुई वे मीरा पर बोलते हुए काफी भावुक हो गई. वे कहती है मीरा एक राधा की तरह, एक सखी की तरह है. मैं भी अपने को एक सखी की तरह कृष्ण प्रेम में रम जाना चाहती हूं.
