
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस प्रणय वर्मा व जस्टिस जेके पिल्लई की ग्रीष्म अवकाशकालीन युगलपीठ ने नदी के बीच अस्थायी सड़क बनाकर नैसर्गिक प्रवाह रोके जाने के आरोप को गंभीरता से लिया। युगलपीठ ने मामले में राज्य शासन व संबंधित ठेकेदार फर्म एसोसिएट कामर्स सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई जून के तीसरे सप्ताह के बाद नियत की है।
जनहित याचिकाकर्ता अनूपपुर अंतर्गत बिजुरी निवासी प्रकाश सिंह परिहार की ओर से पक्ष रखा गया। दलील दी गई कि जिले की केवई नदी में अवैध रेत उत्खनन जारी है। यही नहीं नदी के बीच में अस्थायी सड़क बनाकर नैसर्गिक प्रवाह को बाधित कर दिया गया है। न्यायालय को बताया गया कि जिले की 18 रेत खदानों (कुल क्षेत्रफल 89.421 हेक्टेयर) के संचालन के लिए ई-टेंडर जारी हुआ था। इसमें नर्मदापुरम के पिपरिया स्थित फर्म एसोसिएट कामर्स ने लगभग 17.75 करोड़ रुपये की सर्वाधिक वार्षिक बोली लगाकर ठेका हासिल किया था। खनिज विभाग द्वारा अनुमति के बाद कोतमा तहसील के ग्राम गोहन्द्रा स्थित आराजी नंबर 843, 846 एवं 847 की भूमि पर रेत खनन शुरू किया गया। खनन कार्य के दौरान ठेकेदार ने केवई नदी की मुख्य जलधारा के बीच अस्थायी सड़क का निर्माण कर दिया, जिससे नदी का जल प्रवाह अवरुद्ध हो गया। इससे लोकल एनवायरमेंट, वाटर ईको-सिस्टम और वाटर नेचुरल फ्लो प्रोसेस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रशासन और संबंधित विभागों को कई शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई कार्यवाही न होने पर हाईकोर्ट की शरण ली गई है।
