नई दिल्ली, 5 जून (वार्ता) इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने शुक्रवार को कहा कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और इंडिया एआई (कृत्रिम मेधा) मिशन जैसी प्रमुख पहलें अनुसंधान, विनिर्माण और नवाचार-आधारित आर्थिक वृद्धि के नए अवसर सृजित कर रही हैं तथा सरकार सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रानिक्स क्षेत्र में प्रगतिशील नीतियों, कारोबार में सुगमता और प्रौद्योगिकी तक बेहतर पहुंच के माध्यम से अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
श्री प्रसाद इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) के अंतर्गत कार्यरत सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के 35वें स्थापना दिवस के अवसर पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे। इस क्षेत्र में भारत के भविष्य के कदमों पर आयोजित चर्चा के विषय “एसटीपीआई टेक समिट 2026: इंडियाज़ नेक्स्ट लीप” पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा , “एसटीपीआई की 35 वर्षों की यात्रा देशके प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के उल्लेखनीय परिवर्तन और एक वैश्विक डिजिटल शक्ति के रूप में उसकी उभरती पहचान को दर्शाती है। मोदी सरकार के नेतृत्व में देश भारत नवाचार, उद्यमिता और तकनीकी आत्मनिर्भरता पर आधारित भविष्य-उन्मुख डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहा है। आगे की यात्रा में एसटीपीआई जैसे संस्थान उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, नवाचार को बढ़ावा देने, उभरती प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी प्रणालियों को सुदृढ़ करने और वैश्विक बाजारों के लिए विश्वस्तरीय समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा, “एसटीपीआई की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक इसकी विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाने की क्षमता है। यह उद्यमियों, मार्गदर्शकों, वेंचर कैपिटल निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को साथ लाकर नवाचार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। एसटीपीआई को भविष्य में उपलब्ध अवसरों की पहचान करनी होगी और इसकी मजबूत विरासत का उपयोग उभरते क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए करना होगा।”
एसटीपीआई के महानिदेशक अरविंद कुमार ने कहा कि एसटीपीआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। देशभर में 73 केंद्रों, 1,700 से अधिक स्टार्टअप्स को दिए गए सहयोग और भारत के आईटी निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान के माध्यम से एसटीपीआई ने महानगरों से आगे बढ़कर टियर-2 और टियर-3 शहरों में प्रौद्योगिकी आधारित विकास को गति दी है। सेंटर्स ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप, नेक्स्ट जेनरेशन इन्क्यूबेशन स्कीम और लीप अहेड कार्यक्रम जैसी पहलों के माध्यम से एसटीपीआई नवप्रवर्तकों को सशक्त बनाने, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और भारत को वैश्विक प्रौद्योगिकी महाशक्ति बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।”
उद्घाटन सत्र में नीति आयोग की विशिष्ट फेलो एवं नीति फ्रंटियर टेक हब की मुख्य वास्तुकार देबजानी घोष तथा अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम), नीति आयोग के मिशन निदेशक दीपक बागला ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर एसटीपीआई ने अपनी 35 वर्षों की यात्रा का दस्तावेजीकरण करने वाला एक स्मारक संकलन जारी किया गया1
कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी निर्यात में योगदान देने वाले अग्रणी आईटी और आईटीईएस निर्यातकों को सम्मानित किया तथा नवाचार, उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वाधवानी फाउंडेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया।
