नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने की योजनाएं आठ वर्षों से अधूरी नर्मदा के आंचल में मिल रहा है नालों का पानी

( पुनीत दुबे )इटारसी। नर्मदापुरम नर्मदा के भक्त और नर्मदा संरक्षक के लिए काम करने वाले समाजसेवी और बुद्धिजीवी नर्मदा की सेहत और स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि केंद्र सरकार ने गंगा संरक्षण के लिए जिस तरह का सख्त कानून बनाया है, जिसमें गंगा में कूड़ा डालने, थूकने पर जेल की हवा खानी पड़ सकती है, सजा का भी प्रावधान है पर नर्मदा में गंदे नाले बहाए जा रहे हैं पर इस पर पाबंदी लगाने के बारे में क्यों सोचा नहीं जा रहा है। उनका स्पष्ट मत है कि केंद्र सरकार जिस प्रकार कठोर नियम गंगा प्रदूषण को बचाने के लिए गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए बनाया है वैसे ही कठोर नियम नर्मदा और देश की अन्य नदियों को बचाने के लिए बनाया जाना चाहिए।

नर्मदा को कर रहें है नाले प्रदूषित

प्रदेश की जीवनदायिनी कहीं जाने वाली नर्मदा नदी लगातार प्रदूषित होते ही जा रही हैं । उस का जल पीने योग्य नहीं रहा है। नर्मदापुरम के अलावा अन्य बड़े शहरों के साथ गांव की गंदे पानी के नाले नर्मदा में मिल रहे हैं। इसके कारण नर्मदा नदी का पानी गंदा हो रहा है। वहीं पानी में खतरनाक रसायनों की मात्रा बढ़ती जा रही है। इससे जल ही जीवन और वनस्पति को भी भारी नुकसान हो रहा है। नर्मदा में छोटे बड़े लगभग 35 नालों से लगातार नर्मदा में गंदगी मिल रही है। शहर के प्रसिद्ध सेठानी घाट के ठीक ऊपर पूरे शहर की गंदगी कोरी घाट के नाले के जरिए बिना किसी फिल्टर प्लांट के नर्मदा में उड़ेली जा रही है। शहर की गंदगी को साफ करने के लिए यहां फिल्टर प्लांट भी बनाया गया था लेकिन कई सालों से बंद पड़ा है। जिस स्थान पर उक्त नाला नर्मदा में मिलता है, वहां पानी एकदम काला दिखाई देता है । इसके अलावा मालाखेड़ी से डोंगरवाड़ा तक लगभग 28 नाले नर्मदा को प्रदूषण कर रहे है। ड़ोंगरवाडा के पास एसपीएम से निकलने वाला रसायन युक्त काला पानी नर्मदा को मैला कर रहा है । प्रदूषण रोकने के लिए भीलपुरा ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना थी, बाजार क्षेत्र के नालों को लेंडिया बाजार के नाले के माध्यम से जोड़कर डायवर्ट कर भीलपुरा ट्रीटमेंट प्लांट में जोड़ना था ताकि नालों का गंदा पानी सीधा नर्मदा में न मिल सके। इसमें सदर बाजार, कोठी बाजार, इतवारा पुरानी सब्जी मंडी मछली मार्केट बसंत टॉकीज के पीछे वाले नाले शामिल है। बड़ी पहाड़ी शांति नगर नारायण नगर एसपीएम के छोटे नाले डोंगरवाड़ा मुख्य नाले को जोड़ना था जिस पर आज तक कोई काम नहीं हुआ । इसके लिए प्रशासन के साथ साथ जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा, लापरवाही और उदासीनता जिम्मेदार है।

करोडो की योजनाएं बनती हैं पर मैदान पर कुछ नहीं

200 करोड़ की नर्मदापुरम सीवरेज परियोजना के जरिए नालों के गंदा पानी को शोधन करने के लिए शहर में एक 24 एमएलडी के एसटीपी प्लांट 4 पंप हाउस का निर्माण होना था। इसमें अभी तक दो पंप हाउस का निर्माण होना बाकी है। वहीं 100 किलोमीटर तक भूमिगत पाइप लाइन डालकर घरों से निकलने वाले पानी को फिल्टर प्लांट तक पहुंचाना था लेकिन अभी तक 80 किमी क्षेत्र में ही पाईप लाइन डली है 20 किलोमीटर क्षेत्र में पाइप डालना बाकी है।

श्रद्धालुओं को गंदगी के बीच लगाना पड़ रही श्रद्धा की डुबकी

पर्यटन घाट नाले से नर्मदा में मिलने वाली गंदगी सेठानी घाट के किनारों तक आ जाती है। मजबूरी में श्रद्धालु गंदगी के बीच ही डुबकी लगाते हैं। सुबह तो श्रद्धालुओं को पहले पानी में तैर रही गंदगी को साफ करना पड़ता है इसके बाद ही स्नान कर पाते हैं।

जलीय जीव को नुकसान

प्लास्टिक और कैमिकल जलीय जीवों के शरीर में जमा हो रहे हैं। इससे पानी में मरने से बैक्टिरिया पनपते हैं। प्लास्टिक मछली सहित अन्य जीवों के लिए नुकसानदायक है।

सोडियम लॉरिल सल्फेट से त्वचा और आंखों में जलन।

पैराबेन हार्मोन असंतुलन, कैंसर का खतरा।

फ्थालेट्स- प्रजनन समस्याएं, हार्मोन गड़बड़ी।

टिक्लोसन एंटीबैक्टीरियल, जल प्रदूषण।

फॉस्फेट- जल प्रदूषण, अल्गल ब्लूम।

शैंपू, साबुन और डिटर्जेंट में उपयोग में होने वाले

आर्टिफिशियल परफ्यूम – एलर्जी, त्वचा समस्याएं।

माइक्रोबैड्स- जलीय जीव को नुकसान।

पेस्टिसाइड और फर्टिलाइजर कृषि अवशेष, जल जीवन को नुकसान पहुंचता है।

अमोनिया और नाइट्रेट नालों के सीवेज का नर्मदा में मिलता

नर्मदापुरम. अमूल्य धरोहर नर्मदा नदी अनदेखी के कारण मैली होती जा रही है। शहर स्थित घाटों पर श्रद्धालु बेधड़क साबुन, शैंपू आदि कैमिकल का उपयोग कर रहे हैं। शहर की गंदगी नालों के माध्यम से नर्मदा नदी में मिल रही है। कई तरह के कैमिकल मिलने से पानी की गुणवत्ता खराब होती है। इससे मानव स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। प्रदूषित पानी पीने से बीमारियां फैलती है। वहीं नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है।

हार्मोन असंतुलन होने से हो रहे कई रोग

सेठानी घाट, विवेकानंद घाट, पर्यटन घाट, पोस्ट ऑफिस घाट, कोरी घाट, मंगलवारा आदि घाटों पर बड़ी संख्या में लोग आते हैं। त्योहारों पर इनकी संख्या और अधिक होती है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग स्नान करते हैं। वहीं घाट पर कपड़े धोते हैं। ऐसे में साबुन, शैंपू आदि कैमिकल युक्त चीजों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में नर्मदा नदी में झाग पानी के ऊपर तैरता रहता है। पानी में बढ़ते प्रदूषण से जलीय जीवों को नुकसान पहुंच रहा है। जिससे माइक्रोप्लास्टिक, सोडियम लॉरिल सल्फेट, नालों के गंदे से पानी अमोनिया और नाइट्रेट से जल प्रदूषित हो रहा है। लंबे समय तक उपयोग करने से चर्म रोग, पेट में इंफेक्शन, दस्त, बाल झड़ना, आंखों में जलन, हार्मोन असंतुलन, कैंसर, प्रजनन समस्याएं सहित लीवर, किडनी और हार्ट पर असर होता है। जलीय जीवों के शरीर में प्लास्टिक जमा हो रहा है। मरने पर पानी में बैक्टिरिया होते हैं। वही मीट का सेवन करने से मानव शरीर में जा रहा है।

इनका कहना है कि

पवित्र मॉं नर्मदा के आंचल में मिल रहा है शहर का गंदा पानी इसके लिये मेरे कार्यकाल में कई योजनाओं को आगे बढाया था उन पर काम हो जाता तो मॉ नर्मदा प्रदूषण मुक्त हो जाती।

अखिलेष खण्डेलवाल, पूर्व नपा अध्यक्ष

नर्मदापुरम

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