
नई दिल्ली | आम जनता के लिए महंगाई एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, घर पर बनने वाली शाकाहारी थाली की लागत में 5 प्रतिशत और मांसाहारी थाली में 7 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मई महीने में टमाटर की कीमतों में 57 प्रतिशत का भारी उछाल और एलपीजी व वनस्पति तेल की बढ़ती कीमतों ने घरेलू बजट को बुरी तरह प्रभावित किया है।
टमाटर के बाद आलू-प्याज की चुनौती
वर्तमान में टमाटर की कीमतों में महीने-दर-महीने 23 फीसदी की वृद्धि देखी गई है, जिसका मुख्य कारण गर्मी के कारण फसल को हुआ नुकसान और उत्पादन में कमी है। हालांकि, अभी तक आलू और प्याज की कीमतों में राहत बनी हुई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि उपभोक्ताओं को जल्द ही इन सब्जियों के मोर्चे पर भी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। रबी की फसल ने फिलहाल कीमतों को नियंत्रित रखा है।
मांसाहारी थाली पर चिकन की मार
मांसाहारी थाली की लागत में वृद्धि का एक प्रमुख कारण ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में हुई 9 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी है, जो मांसाहारी भोजन के कुल खर्च का लगभग आधा हिस्सा है। टमाटर और ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों के साथ चिकन के महंगे होने ने मांसाहारी भोजन को काफी खर्चीला बना दिया है। खाद्य और ऊर्जा की ये बढ़ी हुई लागतें घरेलू रसोई पर लगातार दबाव बना रही हैं, जिससे आम आदमी की थाली और महंगी होती जा रही है।
