तेहरान, 04 जून (वार्ता) ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि अमेरिका और इजराइल जैसे दुश्मनों ने युद्ध के मैदान में निर्णायक हार और गहरी बेइज्जती का सामना करने के बाद ईरान के खिलाफ ‘हाइब्रिड युद्ध’ की रणनीति अपनाते हुए अब अपना ध्यान हमारे देश को अंदर से अस्थिर करने पर केंद्रित कर दिया है।
श्री खामनेई ने इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक इमाम खुमैनी की पुण्यतिथि की 37वीं वर्षगांठ के मौके पर गुरुवार को जारी एक संदेश में बोलते हुए घोषणा की कि ईरान के दुश्मनों को युद्ध के मैदान में ‘गहरी शर्मिंदगी’ झेलनी पड़ी है और अब उन्होंने उन चालों का सहारा लेना शुरू किया है जिन्हें हाईब्रिड युद्ध की चालें कही जाती हैं।
उन्होंने कहा, “दुष्ट दुश्मन, सशस्त्र बलों में आपके बहादुर बेटों के साथ टकराव में हारने के बाद… अपने प्रयासों को दो लक्ष्यों पर केंद्रित कर रहा है-लोगों के मनोबल को तोड़ना और देश के अधिकारियों के बीच गलतफहमियां पैदा करना।”
श्री खामेनेई ने एक लिखित संदेश में कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाला ‘दमनकारी तंत्र’ एक मजबूत और स्वतंत्र ईरान को स्वीकार नहीं कर सकता और उन्होंने इजराइल को उस तंत्र की एक ‘सैन्य चौकी’ बताया।
श्री खामेनेई ने अमेरिका को ‘दमनकारी प्रभुत्व तंत्र’ के पीछे की मुख्य शक्ति बताया और इजराइल को एक सैन्य चौकी बताते हुए कहा कि इसे लगभग 80 साल पहले इस क्षेत्र में उस तंत्र के हितों की पूर्ति के लिए बनाया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि यह तंत्र मूल रूप से एक मजबूत, स्वतंत्र ईरान को बर्दाश्त नहीं कर सकता, जो उनके अनुसार तथाकथित ‘ग्रेटर इजराइल’ परियोजना की पूर्वी सीमा पर स्थित है।
श्री खामेनेई के अनुसार इस नए चरण में दुश्मन के मुख्य हथियार मनोवैज्ञानिक हैं। वे आम ईरानियों और उनके नेतृत्व के बीच संदेह, निराशा, भय और फूट बो रहे हैं। उन्होंने सभी ईरानियों से एकता, सतर्कता और आपसी विश्वास के माध्यम से इन प्रयासों का मुकाबला करने का आह्वान किया और चेतावनी दी कि कोई भी व्यक्ति जो संदेह या निराशा फैलाता है और यह भले ही अनजाने में हो वह प्रभावी रूप से दुश्मन का ही काम कर रहा है।
उन्होंने कहा, “कोई भी ऐसा कार्य जो लोगों के बीच निराशा और हताशा पैदा करता है, उसे इस देश और इसके लोगों के दुश्मन की मदद का एक रूप माना जाता है।”
गौरतलब है कि श्री खामेनेई का यह संदेश दक्षिणी तेहरान में इमाम खुमैनी के मकबरे पर जमा हुए लाखों ईरानियों के सामने दिया गया। देशभर से शोक मनाने और विदेशों से आए श्रद्धालु 1979 की क्रांति के आदर्शों के प्रति अपनी निष्ठा की पुष्टि करने के लिए यहां आए थे।
श्री खामेनेई की ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब स्थिति बेहद तनावपूर्ण है और अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता फिलहाल ठप पड़ी है तथा दोनों पक्ष धन, समृद्ध यूरेनियम भंडार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं।
उनका यह बयान स्पष्ट रूप से देश के भीतर मनोबल बढ़ाने और आत्मविश्वास प्रदर्शित करने के उद्देश्य से दिया गया लगता है। ऐसा उस समय किया गया है जब आर्थिक दबाव और कूटनीतिक अनिश्चितता का बोझ ईरानी जनता पर लगातार भारी पड़ रहा है।
