हिज्बुल्ला ने लेबनान-इजरायल युद्धविराम को नकारा, कहा, यह आत्मसमर्पण

बेरूत, 04 जून (वार्ता) लेबनान के चरमपंथी संगठन हिज्बुल्ला के प्रमुख नईम कासिम ने इजरायल-लेबनान के बीच हुए युद्धविराम को सिरे से खारिज करते हुए गुरुवार को कहा कि यह बस एक अलग तरीके का ‘आत्मसमर्पण’ है।

उन्होंने इज़रायल और लेबनान द्वारा एक नये युद्धविराम समझौते की घोषणा किये जाने के एक दिन से भी कम समय बाद यह बात कही। दोनों देशों को उम्मीद थी कि यह समझौता एक स्थायी और व्यापक व्यवस्था का रूप ले लेगा।

दोनों सरकारों ने बुधवार को जारी एक संयुक्त बयान में कहा कि यह युद्धविराम इस शर्त पर लागू होगा कि ‘हिज़्बुल्ला की ओर से गोलीबारी पूरी तरह बंद हो जाये और लिटानी नदी के दक्षिण के इलाकों से हिज़्बुल्ला के सभी लड़ाके हट जायें।’

नये युद्धविराम की शर्तों के तहत, इज़रायल और लेबनान दोनों बुधवार को दक्षिणी लेबनान के भीतर कई ‘पायलट’ सुरक्षा क्षेत्र बनाने पर सहमत हुए। इन क्षेत्रों में लेबनानी सेना पूरी सुरक्षा व्यवस्था संभालेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि ईरान समर्थित हिज्बुल्ला अपने सभी अभियान बंद कर दे।

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने दिन में पहले कहा था कि इज़रायल के साथ नये युद्धविराम समझौते के मसौदे पर हिज़्बुल्ला की प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहे हैं। श्री आउन ने बाबे पैलेस में पत्रकारों से कहा कि अमेरिकी मध्यस्थता वाले इस समझौते पर कोई भी अंतिम घोषणा करने से पहले राष्ट्रपति कार्यालय सभी संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार कर रहा है।

उन्होंने कहा था कि अगर हिज्बुल्ला समझौते पर रजामंदी जाहिर करता है तो यह 24 घंटे के भीतर शुरू हो सकता है। हिज़्बुल्ला के नेतृत्व ने युद्धविराम और संभावित शांति समझौते की सभी उम्मीदों को तुरंत ही राख में मिला दिया। श्री क़ासिम ने समूह के अल-मनार टीवी चैनल पर प्रसारित एक लिखित बयान में इस प्रस्तावित व्यवस्था की निंदा करते हुए कहा कि यह यरुशलम के पक्ष में काम करती है, क्योंकि यह हिज़्बुल्ला से रियायतें मांगती है, जबकि दूसरी तरफ़ इजरायली सेना के अभियान जारी रहते हैं।

उन्होंने कहा, “ यह एक झूठे युद्धविराम के तहत बनाया गया सुरक्षा ढांचा जिसमें हिज़्बुल्ला को गोलीबारी रोकने और दक्षिण से पीछे हटने के लिए कहा जाता है, जबकि सैन्य दबाव में हमला जारी रहता है। यह तो आत्मसमर्पण और हार है।”

श्री क़ासिम ने इस समझौते तक पहुंचने वाली बातचीत को ‘बेतुका’ और ‘अपमानजनक’ बताया। उन्होंने दावा किया कि इस प्रस्ताव से लेबनान का कुछ हिस्सा असुरक्षित रह जाएगा, जबकि दूसरों के अधिकार छीन लिये जायेंगे।

उन्होंने इस सौदे को ‘लेबनानी लोगों के एक हिस्से के विनाश और बाकी लोगों को गुलाम बनाने का रास्ता’ बताते हुए कहा, “ यह एक भ्रम है, ठीक वैसे ही जैसे शैतान का जन्नत में जाने का सपना।”

हिज़्बुल्ला प्रमुख ने समूह के उस पुराने रुख को दोहराया कि किसी भी समझौते की शुरुआत इज़रायली सैन्य अभियानों पर पूरी तरह रोक और इज़रायली सेना की पूर्ण वापसी से ही होनी चाहिये। उन्होंने कहा, “ हमें केवल आक्रामकता की पूर्ण समाप्ति और इज़रायल की पूर्ण वापसी से सरोकार है। हम हमलावरों से तब तक लड़ेंगे, जब तक हम उन्हें खदेड़ नहीं देते और उनकी आक्रामकता को रोक नहीं देते।”

इससे पूर्व, श्री आउन ने वाशिंगटन में बुधवार को हुई बातचीत का ज़िक्र करते हुए कहा कि वह वार्ता ‘बहुत कठिन’ और एक थकाने वाली प्रक्रिया थी। बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के व्यक्तिगत हस्तक्षेप की ज़रूरत पड़ी, क्योंकि लेबनानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख साइमन करम ने कुछ समय के लिए बातचीत रोक दी थी।

दोनों पक्ष 22 जून को वाशिंगटन डीसी में बातचीत का एक नया दौर आयोजित करने वाले हैं। तीनों पक्ष इस युद्धविराम को एक स्थायी और व्यापक शांति समझौते में बदलने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे बदले में ईरान के साथ होने वाली बातचीत को भी मदद मिलेगी क्योंकि वह बातचीत सीधे तौर पर लेबनान की स्थिति पर निर्भर करती है।

 

 

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