रुबियो ने विदेशी सहायता नीति में बदलाव का बचाव करते हुए कहा, ‘अमेरिकी हितों के अनुरूप हो मदद’

वाशिंगटन, 04 जून (वार्ता) अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विदेशी सहायता कार्यक्रमों (यूएस एड) में किये गये व्यापक बदलावों का बचाव करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य अमेरिका के राष्ट्रीय और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाना का होना चाहिये, न कि वह स्वत: कोई स्वतंत्र रणनीति बने।
श्री रुबियो ने वित्त वर्ष 2027 के बजट प्रस्ताव पर सीनेट की विनियोजन उपसमिति (स्टेट, फॉरेन ऑपरेशंस एंड रिलेटेड प्रोग्राम्स) के समक्ष पेश होते हुए गुरुवार को कहा कि अमेरिका अब तक 32 देशों के साथ ऐसे समझौते कर चुका है, जिनका उद्देश्य उनकी घरेलू क्षमताओं और स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रशासन का लक्ष्य विदेशी सहायता को अमेरिका के रणनीतिक हितों के अनुरूप ढालना है।

श्री रुबियो ने कहा, “ सबसे अच्छे विदेशी सहायता कार्यक्रम वे होते हैं, जिनकी अंततः जरूरत समाप्त हो जाती है। इसका मतलब है कि जिस देश की मदद की जा रही है, वह इतना सक्षम हो गया है कि उसे अब सहायता की आवश्यकता नहीं रही।” उन्होंने दक्षिण कोरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी वह अमेरिकी सहायता प्राप्त करने वाला प्रमुख देश था, लेकिन आज वह दुनिया की नौवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और स्वयं अन्य देशों को सहायता प्रदान कर रहा है।

विदेश मंत्री ने कहा कि प्रशासन ने सहायता कार्यक्रमों का ध्यान एशिया और पश्चिमी गोलार्ध की ओर बढ़ाया है। इसके साथ ही वैश्विक निधि और संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) जैसे बहुपक्षीय संगठनों के साथ नये समझौते किये गये हैं, ताकि अमेरिकी करदाताओं के धन का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा, “ चाहे सहायता का पुनर्संरेखण हो या नये समझौते, हमारी सहायता का बड़ा हिस्सा अब एशिया और पश्चिमी गोलार्ध की ओर जा रहा है। हम 32 देशों के साथ समझौते कर चुके हैं, जिससे उनकी घरेलू क्षमताएं और स्वास्थ्य प्रणालियां मजबूत होंगी। ”

श्री रुबियो ने बताया कि ‘फूड फॉर पीस’ कार्यक्रम को कृषि विभाग के अधीन स्थानांतरित किया जा रहा है, क्योंकि उसका कृषि क्षेत्र से अधिक सीधा संबंध है। उन्होंने पूर्व की सहायता प्रणाली की आलोचना करते हुए कहा कि कई देशों की सरकारों ने शिकायत की थी कि अमेरिकी सहायता अक्सर गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के माध्यम से दी जाती थी और उसमें संबंधित सरकारों के साथ पर्याप्त समन्वय नहीं होता था। श्री रुबियो ने कहा, “ हम अक्सर यह तय कर रहे थे कि उन्हें क्या चाहिए, जबकि हमें यह सुनना चाहिए था कि वे वास्तव में क्या मांग रहे हैं।” डेढ़ दशक से ज्यादा तक सीनेटर रहने के बाद विदेश मंत्री बने श्री रुबियो ने स्वीकार किया कि बजट आवंटन में कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका है और उन्हें यह अपेक्षा नहीं है कि संसद प्रशासन के बजट प्रस्ताव को बिना किसी बदलाव के स्वीकार कर लेगी।

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